डीएमएफ का गठन न होने पर हाईकोर्ट गंभीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र ने 12 जनवरी 2015 को अधिसूचना जारी की थी। सितंबर 2015 में केंद्रीय खान मंत्रालय ने राज्यों को क्रियान्वयन के लिए पत्र जारी कर दिया था। राज्य सरकारों को अधिसूचना जारी कर कोयला खनन से संबंधितों जिलों में डीएमएफ का गठन कराना था। 12 जनवरी 2015 से पूर्व जारी पट्टों की खनन रायल्टी का 30 फीसदी और 12 जनवरी 2015 के बाद के खनन पट्टों की रायल्टी की दस फीसदी रकम इस मद में जमा होनी थी। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों ने इसे लागू कर लिया।
सिंगरौली को एनसीएल ने अक्तूबर 2015 से अब तक तीन सौ करोड़ से अधिक रकम भी अदा कर दी। सोनभद्र के खाते में भी करीब 65 करोड़ की रकम आई है, लेकिन डीएलएफ का गठन कर खाता न खोलने से रुपये एनसीएल में डंप हैं। एनसीएल प्रबंधन का कहना है कि सोनभद्र से सिर्फ एनएमईटी अकाउंट मिला है। डीएलएफ का अकाउंट मिलने के बाद ही धनराशि रिलीज होगी।
अमर उजाला ने दो माह पहले ही इस मामले का खुलासा किया था। उस समय डीएम का कहना था कि डीएलएफ के लिए क्या नियम है? इसका पता कर जरूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सप्ताह भर पूर्व पंकज मिश्रा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की, जहां सात नवंबर को सुनवाई हुई। अधिवक्ता अभिषेक चौबे के मुताबिक कोर्ट ने जिला प्रशासन की लापरवाही मानी और एक सप्ताह के भीतर पहल का आदेश जारी कर दिया। आदेश का पालन हुआ कि नहीं, इसके लिए 15 नवंबर को फ्रेश केस के रूप में प्रकरण की सुनवाई की जाएगी।