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जर्जर सरकारी भवनों में सहम कर रहते हैं लोग
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Wed, 29 Apr 2015 11:18 PM IST
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जिले में जर्जर सरकारी भवनों में रह रहे लोग दहशत के साए में हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के जर्जर भवनों में कर्मचारियों को रहने के लिए आवास आवंटित किया गया है।
पूर्व में बीएसए कार्यालय के पीछे के आवास का बारजा भी गिर गया था, जिससे लिपिक उमाशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी तरह विकास भवन की दीवारों में भी दरार है।
यह भवन कब गिर जाएं, इसको लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। हाल में आए भूकंप ने जर्जर भवनों में रह रहे लोगों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है।
जलजला के दौरान अपनी जान बचाने के लिए लोग अपने घरों को छोड़कर बाहर भाग निकले थे। लेकिन पूर्व से ही जो भवन जर्जर हैं और गिरने की स्थिति में हैं,
उनमें रहने वालों का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के भवन कई दशक पूर्व बने थे।
इसके एक हिस्से में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय है, जबकि उसके ठीक बगल में कर्मचारियों के रहने के लिए आवास है। वह आवास भी पूरी तरह से जर्जर है।
पूर्व में जर्जर आवास का बारजा गिरने से उसमें रहने वाले बीएसए कार्यालय के लिपिक उमाशंकर यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बावजूद अब तक आवासों की मरम्मत नहीं हुई।
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इन आवासों में रहने वाले लोग दहशत के साए में जी रहे हैं। इसी तरह बीएसए कार्यालय भी जर्जर है। दीवारें कई जगह से फट गई हैं। ऐसे में यह भवन कब गिर जाएगा, कहा नहीं जा सकता।
बीएसए नंदलाल सिंह का कहना है कि बीएसए कार्यालय भवन की जर्जरता को देखते हुए डायट परिसर में ही नया भवन बनाने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
उसकी अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। उधर विकास भवन में भी जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय के साथ ही लघु सिंचाई विभाग कार्यालय के दीवारों में दरार आ गई है।
सिंचाई विभाग के कार्यालय के पिछले हिस्से का पीलर भी क्षतिग्रस्त है। यहां के कर्मचारी भी दहशत में हैं। सीडीओ महेंद्र सिंह का कहना है कि जहां कहीं दीवारों में दरार होगी उसे सही कराया जाएगा। उसे पहले ही संज्ञान में लिया गया है।
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पूर्व में बीएसए कार्यालय के पीछे के आवास का बारजा भी गिर गया था, जिससे लिपिक उमाशंकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी तरह विकास भवन की दीवारों में भी दरार है।
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यह भवन कब गिर जाएं, इसको लेकर लोगों में दहशत का माहौल है। हाल में आए भूकंप ने जर्जर भवनों में रह रहे लोगों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है।
जलजला के दौरान अपनी जान बचाने के लिए लोग अपने घरों को छोड़कर बाहर भाग निकले थे। लेकिन पूर्व से ही जो भवन जर्जर हैं और गिरने की स्थिति में हैं,
उनमें रहने वालों का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के भवन कई दशक पूर्व बने थे।
इसके एक हिस्से में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय है, जबकि उसके ठीक बगल में कर्मचारियों के रहने के लिए आवास है। वह आवास भी पूरी तरह से जर्जर है।
पूर्व में जर्जर आवास का बारजा गिरने से उसमें रहने वाले बीएसए कार्यालय के लिपिक उमाशंकर यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बावजूद अब तक आवासों की मरम्मत नहीं हुई।
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इन आवासों में रहने वाले लोग दहशत के साए में जी रहे हैं। इसी तरह बीएसए कार्यालय भी जर्जर है। दीवारें कई जगह से फट गई हैं। ऐसे में यह भवन कब गिर जाएगा, कहा नहीं जा सकता।
बीएसए नंदलाल सिंह का कहना है कि बीएसए कार्यालय भवन की जर्जरता को देखते हुए डायट परिसर में ही नया भवन बनाने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
उसकी अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। उधर विकास भवन में भी जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय के साथ ही लघु सिंचाई विभाग कार्यालय के दीवारों में दरार आ गई है।
सिंचाई विभाग के कार्यालय के पिछले हिस्से का पीलर भी क्षतिग्रस्त है। यहां के कर्मचारी भी दहशत में हैं। सीडीओ महेंद्र सिंह का कहना है कि जहां कहीं दीवारों में दरार होगी उसे सही कराया जाएगा। उसे पहले ही संज्ञान में लिया गया है।