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रोजगार की मांग को लेकर सातवें दिन उपवास पर बैठे विस्थापित

Mon, 04 Jan 2021 07:02 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 07:02 PM IST
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Displaced on fasting for the seventh day demanding employment
बीना जीएम कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित - फोटो : SONBHADRA
अनपरा। एनसीएल बीना कोयला खदान परियोजना में आउटसोर्सिंग कंपनी में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार दिये जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एनसीएल बीना महाप्रबंधक कार्यालय पर विगत छह दिनों से धरने पर बैठे विस्थापितों ने सोमवार से उपवास शुरू कर दिया। पहले दिन अंकुश दूबे और दया सागर उपवास पर बैठे।
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विस्थापितों ने आरोप लगाया कि रोजगार दिलाने की दिशा में एनसीएल बीना परियोजना प्रबंधन हीलाहवाली कर रहा है। कहा बीते छह दिनों से चल रहे धरने के दरम्यान एनसीएल प्रबंधन ने मामले को सुलझाने का कोई प्रयास नहीं किया। एनसीएल बीना ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह तानाशाही पर उतर आई है। कहा कि धरने की जानकारी सीएम योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, डीएम सोनभद्र, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एनसीएल सिंगरौली, महाप्रबंधक कार्मिक एनसीएल सिंगरौली एवं महाप्रबंधक एनसीएल बीना को भेजी गयी है। यह उपवास तब तक जारी रहेगा जब तक विस्थापितों की मांगे पूरी नहीं हो जाती। यहां मनोनीत रवि, पूर्व प्रधान चंदुआर, लालबाबू वर्मा, कृपा सागर दुबे, लक्ष्मीकांत, इम्तियाज शेख, शिवानंद, जयप्रकाश, जनमेजय, रामजी, संतोष दुबे, सतीश, रमाकांत, रविंद्र, छोटेलाल, राजेश, अरविंद, अरूण आदि मौजूद रहे।
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विस्थापितों को रोजगार दिलाने के लिए बीना प्रबंधन दृढ़ संकल्पित
अनपरा। बीना परियोजना केजीएम एलपी गोडसे का कहना है कि एनसीएल बीना परियोजना प्रबंधन विस्थापितों को रोजगार दिलाने के प्रति दृढ़ संकल्पित है। बीना प्रबंधन की कंपनी से लगातार बात हो रही हैं। बीते एक सप्ताह के अंतराल में जिन विस्थापित परिवार के सदस्यों का सूची में नाम है उनको रोजगार दिलाने का प्रयास जारी है। जो जिस योग्य होगा उसे उस योग्यता के आधार पर समायोजित करेगी। 22 दिसंबर के बाद के जो भी आवेदन विस्थापित सदस्यों ने किया है, उस पर विचार नहीं किया जायेगा। इसके लिए प्रबंधन ने पहले ही नोटिस जारी कर दिया था।
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