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भ्रष्टाचार की आंच में झुलसीं विकास की परियोजनाएं
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जिले में विकास को गति देने के उद्देश्य से कई परियोजनाएं तो शुरू की गई थीं, लेकिन इनका काम वित्तीय अनियमितता के चलते ठप पड़ा है। कहा जाए तो विकास की यह परियोजनाएं भ्रष्टाचार की आंच में झुलस गई हैं।
नक्सल प्रभावित नगवां ब्लॉक के नंदना ग्राम पंचायत में वर्ष 2012 में करीब 3.02 करोड़ की लागत से मॉडल स्कूल का निर्माण शुरू किया गया था। इसके पीछे क्षेत्र के गरीब बच्चों को सस्ती शिक्षा देना मकसद था। स्कूल 2015 तक पूर्ण कर यहां कक्षाएं संचालित की जानी थी, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण होने की अवधि बढ़ाकर 2019 कर दी गई। विद्यालय भवन का निर्माण पूर्ण तो हो गया है, लेकिन फर्नीचर आदि का काम अभी नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों की मानें तो वित्तीय अनियमितताएं और धनाभाव के कारण वर्षों से विद्यालय भवन का निर्माण ठप है। मॉडल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का सपना संजोए अभिभावकों ने जिला प्रशासन से स्कूल का निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने की मांग की है।
चतरा ब्लॉक के तियरा ग्राम पंचायत में करीब 3.61 करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्मार्ण 2011 में शुरू हुआ। कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम ने 2012 से ही भवन निर्माण का काम आधा अधूरा छोड़ दिया। निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता मिलने पर 2014 में तत्कालीन मंडलायुक्त ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। यही हाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही का भी है। यहां 3.22 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य होना था, जो वित्तीय अनियमितता के चलते छह वर्ष बाद भी पूर्ण नहीं हो सका है।
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नक्सल प्रभावित नगवां ब्लॉक के नंदना ग्राम पंचायत में वर्ष 2012 में करीब 3.02 करोड़ की लागत से मॉडल स्कूल का निर्माण शुरू किया गया था। इसके पीछे क्षेत्र के गरीब बच्चों को सस्ती शिक्षा देना मकसद था। स्कूल 2015 तक पूर्ण कर यहां कक्षाएं संचालित की जानी थी, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण होने की अवधि बढ़ाकर 2019 कर दी गई। विद्यालय भवन का निर्माण पूर्ण तो हो गया है, लेकिन फर्नीचर आदि का काम अभी नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों की मानें तो वित्तीय अनियमितताएं और धनाभाव के कारण वर्षों से विद्यालय भवन का निर्माण ठप है। मॉडल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का सपना संजोए अभिभावकों ने जिला प्रशासन से स्कूल का निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने की मांग की है।
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चतरा ब्लॉक के तियरा ग्राम पंचायत में करीब 3.61 करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्मार्ण 2011 में शुरू हुआ। कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम ने 2012 से ही भवन निर्माण का काम आधा अधूरा छोड़ दिया। निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता मिलने पर 2014 में तत्कालीन मंडलायुक्त ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। यही हाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही का भी है। यहां 3.22 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य होना था, जो वित्तीय अनियमितता के चलते छह वर्ष बाद भी पूर्ण नहीं हो सका है।
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