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तीसरी लहर से चौकन्ना है विभाग, बच्चों की हो रही ट्रेकिंग
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कोरोना की तीसरी लहर से जूझने के लिए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इस लहर में बच्चों पर खतरे की चेतावनी के मद्देनजर शून्य से 18 वर्ष की आयु वालों पर विशेष नजर रखी जा रही है। सभी ब्लाक स्तरीय सीएचसी-पीएचसी और प्रमुख निजी अस्पतालों में ऐसे बच्चों को ट्रैक किया जा रहा है, जिन्हें सर्दी-खांसी, बुखार की शिकायत है। पिछले एक महीने के दौरान इस आयु वर्ग में कोरोना के नौ केस चिह्नित हुए हैं। इसमें से पांच केस 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों में हैं।
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में हालात काफी भयावह हुए थे। इस लहर में ज्यादातर युवा और बुजुर्ग ही चपेट में आए थे। लिहाजा इस वर्ग को सुरक्षित करने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया जोरों पर है। 18 वर्ष से कम आयु वालों के लिए अभी टीका नहीं आया है। इस वर्ग की प्रतिरोधक क्षमता भी अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चे ही ज्यादा संवेदनशील है। इसके मद्देनजर अभी से अस्पतालों में बच्चों के बेहतर उपचार की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही है। जिला प्रशासन ने इससे भी आगे की तैयारी शुरू कर दी है। तीसरी लहर की दस्तक से पहले ही ऐसे बच्चों की निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके लिए सभी ब्लाक स्तरीय सीएचसी-पीएचसी और प्रमुख निजी अस्पतालों में ट्रेकिंग की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले सर्दी-खांसी, बुखार से पीड़ित बच्चों की एंटीजन किट से कोविड जांच की रही है। इनमें से पॉजिटिव मिलने वालों को अलग रखकर उपचार किया गया है। इस कवायद के माध्यम से विभाग यह सुनिश्चित कर लेना चाह रहा है कि दबे पांव तीसरी लहर दस्तक दे भी तो उसकी पहचान और नियंत्रण में किसी भी तरह की देरी न हो।
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कोरोना की पहली और दूसरी लहर में हालात काफी भयावह हुए थे। इस लहर में ज्यादातर युवा और बुजुर्ग ही चपेट में आए थे। लिहाजा इस वर्ग को सुरक्षित करने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया जोरों पर है। 18 वर्ष से कम आयु वालों के लिए अभी टीका नहीं आया है। इस वर्ग की प्रतिरोधक क्षमता भी अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चे ही ज्यादा संवेदनशील है। इसके मद्देनजर अभी से अस्पतालों में बच्चों के बेहतर उपचार की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही है। जिला प्रशासन ने इससे भी आगे की तैयारी शुरू कर दी है। तीसरी लहर की दस्तक से पहले ही ऐसे बच्चों की निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके लिए सभी ब्लाक स्तरीय सीएचसी-पीएचसी और प्रमुख निजी अस्पतालों में ट्रेकिंग की व्यवस्था की गई है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले सर्दी-खांसी, बुखार से पीड़ित बच्चों की एंटीजन किट से कोविड जांच की रही है। इनमें से पॉजिटिव मिलने वालों को अलग रखकर उपचार किया गया है। इस कवायद के माध्यम से विभाग यह सुनिश्चित कर लेना चाह रहा है कि दबे पांव तीसरी लहर दस्तक दे भी तो उसकी पहचान और नियंत्रण में किसी भी तरह की देरी न हो।
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