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Sonebhadra News: पीएम आवास के 30763 आवेदनों में मिली खामियां, अब नए सिरे से होगा सत्यापन

Thu, 22 Jan 2026 12:40 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:40 AM IST
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Defects found in 30763 PM housing applications, now fresh verification will be done
पीएम आवास प्लस योजना के तहत गांवों में कराए गए सर्वे और इसके जरिये किए गए 1,97,078 आवेदनों में से 30763 में खामियां पाई गई हैं। एआई के जरिये दर्शाई गई कमियां-गड़बड़ियां कितनी सही हैं, इसका नए सिरे से सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जुड़े सबसे ज्यादा मामले म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र के पाए गए हैं। आवेदन-सर्वे में दी गई सूचनाएं सही हैं या गलत, इसकी जांच की जा रही है। खामियों वाले प्रकरणों को जल्द सत्यापन कर लिया जाए इसके लिए सभी खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसको लेकर उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए गए हैं। बताते चलें कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों को पिछले साल पीएम आवास के लाभार्थियों के चयन के लिए विस्तृत रूप से सर्वे प्रक्रिया अपनाई गई है। तीन महीने से अधिक समय तक चली सर्वे प्रक्रिया में कुल एक लाख 97 हजार 78 ग्रामीणों का चयन लाभार्थी के रूप में किया गया था। सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन के साथ उपलब्ध कराई गई सूचनाओं की एआई के जरिये सत्यता जांची गई। एआई प्रक्रिया में 30763 आवेदनों पर सवाल उठाते हुए, उनका नए सिरे से सत्यापन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। खामियों वाले प्रकरणों में सबसे ज्यादा मामले बभनी ब्लाॅक के हैं। सबसे कम संख्या कोन ब्लाॅक की है।
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इन ब्लॉकों में मिली ख्रामियां
एआई प्रक्रिया के जरिये की गई जांच में बभनी ब्लाॅक के 5190, चतरा ब्लाॅक के 3213, चोपन ब्लाॅक के 1928, दुद्धी ब्लाॅक के 3363, घोरावल ब्लाॅक के 2223, करमा ब्लाॅक के 2517, कोन ब्लाॅक के 1745, म्योरपुर ब्लाॅक के 6591, नगवां ब्लाॅक के 1985 और राॅबर्ट्सगंज ब्लाॅक के 2008 मामले पुन: सत्यापन के दायरे में पाए गए हैं। यह आवेदन किसी न किसी रूप में या तो अपूर्ण मिले हैं या फिर उनमें कोई खामियां पाई गई हैं।
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ज्यादातर मामलों में इस तरह की पाई गई है कमियां
कई आवेदन ऐसे मिले हैं जिसमें गंभीर श्रेणी की बीमारी में ऐसे रोगों का जिक्र किया गया है जिन्हें आवास से जुड़े मानक में सामान्य बीमारी का दर्जा हासिल है। कई लोगों ने खुद को विकलांग दिखाया है लेकिन इससे जुड़ा प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है। यही स्थिति जाति से जुड़े कई मामलों में पाई गई है। कुछ लोगों की तरफ से सर्वे में दर्ज कराए गए नाम-पते और आधार कार्ड में दर्ज नाम-पते में भिन्नता मिली है।
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एआई प्रक्रिया के जरिये जिन भी आवेदनों में कमियां पाई गई हैं, उनका नए सिरे से सत्यापन करते हुए दुरूस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बीडीओ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। सत्यापन के दौरान जो स्थितियां सामने आएंगी, उसके आधार पर आवेदनों को सही ठहराने और अस्वीकृत करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। - श्रवण कुमार राय, पीडी डीआरडीए।
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