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अजय ने जेल में कराया था बवाल
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 14 Apr 2016 12:30 AM IST
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वाराणसी जिला जेल में हुए बवाल का मकसद अपराधी अजय यादव का खुद को जेल से छुड़ाना या दूसरे जेल में स्थानांतरण था। क्राइम ब्रांच और अनपरा पुलिस की टीम ने डिबुलगंज में तमंचे और कारतूस के साथ पकड़े गए अदलहाट (रूपौधा), मिर्जापुर निवासी देवराज मौर्या से पूछताछ के बाद बुधवार की शाम इसका खुलासा किया।
एसओ देवप्रकाश यादव और क्राइम ब्रांच प्रभारी भारतभूषण तिवारी ने बताया कि दोनों लोग दोपहर एक बजे के करीब डिबुलगंज में थे। तभी सूचना मिली कि एक अपराधी असलहे के साथ वाराणसी से बस से डिबुलगंज आ रहा है।बस से उतरते ही उसे दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि जनवरी में अजय यादव को लगा कि उसे मुकदमों में सजा हो जाएगी। तब उसने जनवरी में देवराज और वाराणसी जेल में बंद अंकुर के साथ मिलकर चंदौली कचहरी से खुद को छुड़वाने की साजिश रची।
इसके लिए अंकुर ने देवराज को 17 हजार रुपये उपलब्ध कराए। साजिश थी कि गोली चलाकर और बम फेंककर अजय को छुड़ा लिया जाएगा। फरवरी में अजय पेशी पर चंदौली पहुंचा तो देवराज साथियों के साथ कचहरी पहुंचा, लेकिन ऐनवक्त पर बात लीक हो गई और वहीं से शुभम, आंसू निवासी बबुरी, अनमोल निवासी अदलहाट दबोच लिए गए। योजना फेल हुई तो अजय ने वाराणसी जिला जेल बवाल की साजिश रच डाली।
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इसके बाद उसे आजमगढ़ जेल भेज दिया गया। इधर, अंकुर को 15 अप्रैल को जेल से छूटकर बाहर आना था। इसके बाद फिर से अजय को छुड़ाने की योजना बनाई जानी थी, इसके लिए नेपाल में रह रहे खड्गबहादुर निवासी पहाड़िया, वाराणसी से देवराज वाट्सअप से संपर्क में बना हुआ था। योजना बनती, इससे पहले ही देवराज को दबोच लिया गया। हे।
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एसओ देवप्रकाश यादव और क्राइम ब्रांच प्रभारी भारतभूषण तिवारी ने बताया कि दोनों लोग दोपहर एक बजे के करीब डिबुलगंज में थे। तभी सूचना मिली कि एक अपराधी असलहे के साथ वाराणसी से बस से डिबुलगंज आ रहा है।बस से उतरते ही उसे दबोच लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि जनवरी में अजय यादव को लगा कि उसे मुकदमों में सजा हो जाएगी। तब उसने जनवरी में देवराज और वाराणसी जेल में बंद अंकुर के साथ मिलकर चंदौली कचहरी से खुद को छुड़वाने की साजिश रची।
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इसके लिए अंकुर ने देवराज को 17 हजार रुपये उपलब्ध कराए। साजिश थी कि गोली चलाकर और बम फेंककर अजय को छुड़ा लिया जाएगा। फरवरी में अजय पेशी पर चंदौली पहुंचा तो देवराज साथियों के साथ कचहरी पहुंचा, लेकिन ऐनवक्त पर बात लीक हो गई और वहीं से शुभम, आंसू निवासी बबुरी, अनमोल निवासी अदलहाट दबोच लिए गए। योजना फेल हुई तो अजय ने वाराणसी जिला जेल बवाल की साजिश रच डाली।
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इसके बाद उसे आजमगढ़ जेल भेज दिया गया। इधर, अंकुर को 15 अप्रैल को जेल से छूटकर बाहर आना था। इसके बाद फिर से अजय को छुड़ाने की योजना बनाई जानी थी, इसके लिए नेपाल में रह रहे खड्गबहादुर निवासी पहाड़िया, वाराणसी से देवराज वाट्सअप से संपर्क में बना हुआ था। योजना बनती, इससे पहले ही देवराज को दबोच लिया गया। हे।