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हिंदी के प्रयोग से बनाएं नई कार्य संस्कृति
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Wed, 22 Feb 2017 10:13 PM IST
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एनटीपीसी सिंगरौली में सीएच विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विभागीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस अवसपर पर उपप्रबंधक (राजभाषा) आदेश कुमार पांडेय ने आयोजन की उपयोगिता बताई। कहा कि राजभाषा का क्षेत्र व्यापक है । यह सरकारी कामकाज से लेकर शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, उद्यम, रोजगार और व्यापार तक फैला है। सीएचपी के प्रभारी विभागाध्यक्ष एवं एजीएम इंधन प्रबंधन बी कर्मकार ने बदलते समय के अनुसार कंप्यूटर में हिंदी के प्रयोग, ई-टूल्स, यूनीकोड की जानकारी के साथ हिंदी प्रगति रिपोर्ट और हिंदी प्रोत्साहन योजनाओं के संबंध में व्याख्यान दिया। राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें देश का कोई भी नागरिक भाग ले सकता है। यह योजना आधुनिक ज्ञान विज्ञान की विभिन्न विधाओ पर हिंदी में मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गइ्र है। इसमे पहला पुरस्कार दो लाख का होता है द्वितीय सत्र में राजभाषा विभाग के शिव कारण दुबे वेदराही ने हिंदी के संवैधानिक उपबंधों की जानकारी दी और हिंदी की कार्यविधि पर विचार रखे। दर्पण ही नहीं देश की तस्वीर है हिंदी.. कविता सुनाकर कार्यशाला का समापन किया। सभी प्रतिभागियों को हिंदी पत्रिका शक्ति स्वर के अंक प्रदान करने के साथ जीवन शैली से संबंधित साहित्य उपलब्ध कराए गए।
इस अवसपर पर उपप्रबंधक (राजभाषा) आदेश कुमार पांडेय ने आयोजन की उपयोगिता बताई। कहा कि राजभाषा का क्षेत्र व्यापक है । यह सरकारी कामकाज से लेकर शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, उद्यम, रोजगार और व्यापार तक फैला है। सीएचपी के प्रभारी विभागाध्यक्ष एवं एजीएम इंधन प्रबंधन बी कर्मकार ने बदलते समय के अनुसार कंप्यूटर में हिंदी के प्रयोग, ई-टूल्स, यूनीकोड की जानकारी के साथ हिंदी प्रगति रिपोर्ट और हिंदी प्रोत्साहन योजनाओं के संबंध में व्याख्यान दिया। राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें देश का कोई भी नागरिक भाग ले सकता है। यह योजना आधुनिक ज्ञान विज्ञान की विभिन्न विधाओ पर हिंदी में मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गइ्र है। इसमे पहला पुरस्कार दो लाख का होता है द्वितीय सत्र में राजभाषा विभाग के शिव कारण दुबे वेदराही ने हिंदी के संवैधानिक उपबंधों की जानकारी दी और हिंदी की कार्यविधि पर विचार रखे। दर्पण ही नहीं देश की तस्वीर है हिंदी.. कविता सुनाकर कार्यशाला का समापन किया। सभी प्रतिभागियों को हिंदी पत्रिका शक्ति स्वर के अंक प्रदान करने के साथ जीवन शैली से संबंधित साहित्य उपलब्ध कराए गए।