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Sonebhadra News: नहर के लिए मुआवजा 15 विस्वा का, कब्जा एक बीघे पर

Thu, 01 Oct 2026 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:06 AM IST
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Compensation for the canal is for 15 biswas, but possession covers one bigha.
दुद्धी। कनहर सिंचाई परियोजना की बाईं नहर के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। रजखड़, दुम्हान, कादल सहित कई गांवों के किसान मुआवजे की राशि, भूमि के वास्तविक रकबे और मौके पर हुए कब्जे को लेकर सवाल उठा रहे हैं। भूमि विवाद के कारण कई स्थानों पर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई है, जिसका सीधा असर कनहर नहर परियोजना के निर्माण कार्य पर पड़ रहा है। सिंचाई विभाग ने दिसंबर 2026 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन जमीन की अनुपलब्धता के कारण कई खंडों में काम प्रभावित है। रजखड़ गांव के किसान लक्ष्मण का आरोप है कि वर्ष 1985 में उन्हें 15 विस्वा भूमि का मुआवजा मिला था, जबकि अधिकारियों ने मौके पर करीब एक बीघा भूमि पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी गांव के किसान सरजू ने तहसील दिवस में प्रार्थनापत्र देने की बात कही लेकिन अधिकारियों ने संपर्क नहीं किया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ब्रजेश कुशवाहा ने कहा कि नहर निर्माण के समय किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, जिस पर भरोसा करके भूमि अधिग्रहण कराया गया। उनका आरोप है कि कई किसानों की निर्धारित भूमि से अधिक रकबे पर कब्जा किया गया है और अतिरिक्त जमीन के मुआवजे का भुगतान स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि गांव के किसानों को नहर से पानी नहीं मिल रहा है, जबकि लिफ्ट के माध्यम से पानी पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। कनहर नहर खंड दो के अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार ने बताया कि भूमि उपलब्ध कराने के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। लगभग छह करोड़ रुपये की इस परियोजना का निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान जमीन के बदले जमीन और चार गुना से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। खंड तीन में ओबरा और दुद्धी क्षेत्र के गांवों से गुजरने वाली नहर के लिए कई किसानों की भूमि की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है और शेष की भी जल्द कराई जाएगी। खंड चार और पांच के अवर अभियंता आनंद और मनकेश के अनुसार, बाईं नहर के 17 किलोमीटर हिस्से के लिए रेलवे से एनओसी मिल गई है और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि, घिवही, केवाल, फुलवार जैसे गांवों में छोटे-छोटे गाटे होने के कारण भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में दिक्कतें आ रही हैं।
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