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वनकर्मियों की मिलीभगत से पहाड़ी पर बस गई बस्ती

Thu, 12 May 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र Updated Thu, 12 May 2016 12:01 AM IST
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Colony establish in forest dept land
जल रहे जंगल - फोटो : अमर उजाला
जिले में सिर्फ धारा 4 वाली जंगल की जमीन लूटने का खेल ही नहीं हुआ बल्कि एनसीएल से वन विभाग को दी गई जमीन (परासी पहाड़ी) पर जिम्मेदारों की मिलीभगत से एक दो नहीं सौ घरों की बस्ती बसा दी गई। महज ढाई साल में ही सारा खेल हो गया। अब कब्जे के आधार पर वन विभाग की जमीन को दस से सौ रुपये के स्टांप पर खरीद-फरोख्त का भी खेल खेला जा रहा है। ये सब विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक कार्रवाई न होना सवाल खड़े कर रहा है।  
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बताते चलें कि जंगल खाते की यह जमीन वर्षों पूर्व एनसीएल ककरी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। तीन-चार साल पूर्व एनसीएल ने परासी पहाड़ी को अपने लिए निष्प्रयोज्य बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पहाड़ी को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया था। इसको संज्ञान में लेते हुए वर्ष 2013 में रेणुकूट वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ आशीष तिवारी ने यहां बने करीब पचास मड़हों एवं आवासों को ढहा दिया। पांच-छह माह तक तो इस पहाड़ी पर कब्जा नहीं हुआ लेकिन जैसे ही उनका तबादला हुआ, एनसीएल और जंगल के बीच फंसी इस जमीन पर कब्जों का सिलसिला शुरू हो गया।
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सपा नेता आशीष मिश्रा, सच्चिदानंद कुशवाहा आदि का आरोप है कि कि बाद में कुछ वनकर्मियों की मिलीभगत से फिर से इस पहाड़ी पर कब्जा जमाने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों की मानें तो महज ढाई साल में ही यहां करीब सौ घरों की बस्ती बस गई है। आरोपों के मुताबिक इसको लेकर जब भी वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत की जाती है तो संबंधित जमीन की बैरिकेडिंग के लिए एनसीएल से सहयोग न मिलने की बात कह पल्ला झाड़ लिया जाता है। उधर, डीएफओ रेणुकूट का कहना है कि पहाड़ी पर सारे कब्जे अवैध है। कुछ लोगों ने मुकदमा कर दिया था, इसलिए मामला उलझा हुआ था। अब जबकि एनजीटी का स्पष्ट फैसला आ गया है तो जल्द ही अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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