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अनपरा परियोजना में एक लाख टन से नीचे आया कोयले का स्टॉक
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उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सबसे बड़ी अनपरा तापीय परियोजना में शुक्रवार सुबह कोयले का स्टॉक एक लाख टन से भी नीचे आ गया है। कोयले की आपूर्ति कम होने के कारण अनपरा ए व बी परियोजना की इकाइयों के लगातार कम लोड पर संचालित किए जाने से पावर कारपोरेशन को सस्ती बिजली से वंचित होना पड़ रहा है। ऐसे में सूबे में अभी बिजली संकट और गहरा सकता है।
शुक्रवार को अनपरा परियोजना में कोयले का स्टॉक 94700 टन पहुंच गया। नई दिल्ली में शुक्रवार सुबह बिजली घरों को कोयले की आपूर्ति करने वाली कोर कमेटी की बैठक में उत्पादन निगम की परियोजनाओं का कोई जिक्र न होने से अब भी समस्या के समाधान की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। इसे लेकर प्रबंधन के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा रही हैं। हालांकि सूत्रों के अनुसार बैठक में निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना में कोयले की कमी का मुद्दा अवश्य उठाया गया। इससे प्रतीत होता है भुगतान की समस्या बिजली घरों में कोयले की कमी का प्रमुख कारण बना हुआ है। इकाइयों के कम लोड पर संचालित किए जाने से अनपरा ए से 4.32 व बी परियोजना से 1.68 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बैलेंस बनाने के लिए की जा रही आपात कटौती
कोयले की कमी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की कई इकाइयों के बंद होने और कई के कम लोड पर संचालित होने से प्रदेश में विद्युत की उपलब्धता काफी कम हो गई है। इससे मांग बढ़ने पर ग्रामीण फीडरों में अंधाधुंध कटौती की जा रही है। कहीं-कहीं तो रात भर बिजली गुल रह रही है। जल्द ही स्थिति में सुधार न होने पर शहरी फीडरों से भी कटौती की आशंका बनी हुई है।
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शुक्रवार को अनपरा परियोजना में कोयले का स्टॉक 94700 टन पहुंच गया। नई दिल्ली में शुक्रवार सुबह बिजली घरों को कोयले की आपूर्ति करने वाली कोर कमेटी की बैठक में उत्पादन निगम की परियोजनाओं का कोई जिक्र न होने से अब भी समस्या के समाधान की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। इसे लेकर प्रबंधन के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा रही हैं। हालांकि सूत्रों के अनुसार बैठक में निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना में कोयले की कमी का मुद्दा अवश्य उठाया गया। इससे प्रतीत होता है भुगतान की समस्या बिजली घरों में कोयले की कमी का प्रमुख कारण बना हुआ है। इकाइयों के कम लोड पर संचालित किए जाने से अनपरा ए से 4.32 व बी परियोजना से 1.68 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बैलेंस बनाने के लिए की जा रही आपात कटौती
कोयले की कमी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की कई इकाइयों के बंद होने और कई के कम लोड पर संचालित होने से प्रदेश में विद्युत की उपलब्धता काफी कम हो गई है। इससे मांग बढ़ने पर ग्रामीण फीडरों में अंधाधुंध कटौती की जा रही है। कहीं-कहीं तो रात भर बिजली गुल रह रही है। जल्द ही स्थिति में सुधार न होने पर शहरी फीडरों से भी कटौती की आशंका बनी हुई है।
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