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सोनभद्र: अनपरा के बिजली घरों में गहरा सकता है कोयले का संकट, महज तीन दिनों का कोयला बचा

Sun, 03 Oct 2021 06:41 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 03 Oct 2021 06:41 PM IST
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Coal crisis may happen in Anpara power houses only three days coal left in sonbhadra
अनपरा ।

अगर जल्द ही समस्या समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई तो अनपरा के बिजली घरों में कोयला संकट गहरा सकता है। निगम की अनपरा व निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना में तीन दिन का ही कोयला शेष है। भुगतान न होने के कारण कोल कंपनियों ने कोयले की आपूर्ति रोक दी है।

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2630 मेगावाट क्षमता की अनपरा परियोजना की सातों इकाइयों के उत्पादन पर होने की स्थिति में परियोजना को प्रतिदिन 40 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। परियोजना के एक्सईएन (कोल ट्रांसपोर्ट डिविजन) अजय प्रताप सिंह ने बताया कि इस समय रेलवे ने कोयले की आपूर्ति बंद कर रखी है। सिर्फ मेरी गो राउंड के माध्यम से एनसीएल की ककरी व खड़िया परियोजनाओं को बमुश्किल 23 हजार टन कोयले की आपूर्ति हो पा रही है।
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इसमें आधा दिन ही इकाइयों का संचालन किया जा सकता है। परियोजना के पास इस समय एक लाख 40 हजार टन कोयले का स्टॉक है, जबकि सभी सातों इकाइयां लोड पर हैं। अगर जल्द ही कोयले की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो इकाइयों को बंद करने की भी नौबत आ सकती है। वहीं 1200 मेगावाट क्षमता की निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना में भी महज तीन दिन का ही कोयला बचा है।

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एनसीएल प्रबंधन के संपर्क में सीजीएम
कोयले के स्टॉक में कमी को देखते हुए अनपरा परियोजना के सीजीएम इं. आरसी श्रीवास्तव लगातार एनसीएल प्रबंधन के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि कोयला व बिजली एक दूसरे के पूरक हैं। उनका कहना है कि भुगतान को लेकर न तो कभी कोयले की आपूर्ति थमी है और न थमेगी।

15 सौ करोड़ रुपये है बकाया
एनसीएल का उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम पर लगभग 15 सौ करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। माना जा रहा है कि इसी कारण एनसीएल प्रबंधन की ओर से भुगतान के बराबर ही कोयले की आपूर्ति की जा रही है।

कोयले की नहीं है किल्लत
एनसीएल प्रबंधन का कहना है कि कंपनी में कोयले की कोई कमी नहीं है। अनपरा की परियोजनाएं स्वतंत्र पावर प्रोजेक्ट हैं। इसलिए भुगतान के अुसार ही कोयले की आपूर्ति की जा रही है।

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