Sonbhadra: 9वीं की छात्रा का अचानक फूलने लगा पेट, सच्चाई जानकर परिजनों के पैरों तले खिसकी जमीन
कक्षा नौ की छात्रा का पेट बाहर निकला तो शुरू में परिजनों ने नजरअंदाज किया। बढ़ते माह के साथ ही पेट का आकार बढ़ने लगा तो शंका हुई। पूछताछ के बाद किशोरी ने जो कहा उसे जानकर परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोनभद्र जिले के एक गांव में शादी का झांसा देकर किशोरी से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी भी नाबालिग है। घरवालों को इसकी जानकारी तब हुई, जब किशोरी पांच माह की गर्भवती हुई। पीड़िता के भाई की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
किशोरी के भाई ने कोतवाली में तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि बहन (16) कक्षा नौ की छात्रा है। गांव निवासी एक लड़का शादी का झांसा देकर कई माह से यौन शोषण करता रहा। इस बीच उसने बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध भी बनाए, जिससे बहन गर्भवती हो गई। तेजी से उसका पेट बढ़ने पर शक हुआ तो पूछताछ की गई।
इसके बाद सच्चाई सामने आई। कोतवाल श्रीकांत राय ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ दलित उत्पीड़न, पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी भी नाबालिग है। घटना की छानबीन की जा रही है।
किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 वर्ष की कैद
नौ वर्ष पूर्व किशोरी का अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट निहारिका चौहान की अदालत ने दोषी को 10 वर्ष कैद की सजा सुनाई। बुधवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक पन्नूगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 25 जनवरी 2014 को दी तहरीर में अवगत कराया था कि वह अपनी पत्नी के साथ रोजगार के लिए मेले में गया था। घर पर उसकी बेटी (15) अपनी अन्य छोटी बहनों के साथ थी। गांव के कुछ लोग रंजिशन उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गए।
इस तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और पीड़िता को बरामद किया। विवेचक ने हमीरपुर जिले के मुकेश भारती के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी मुकेश भारती को 10 वर्ष की कैद एवं 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।