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बदल रही विद्यार्थियों की पसंद और रुचियां
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:16 PM IST
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तापीय परियोजना स्थित डीएवी पब्लिक सीनियर सेकेंड्री स्कूल में बुधवार को अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षण प्रक्रिया को सुगम बनाने और विद्यार्थियों के सीखने-समझने की क्षमता पर चर्चा की गई। इसके लिए विषय विशेषज्ञों की ओर से कई सुझाव दिए गए। वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों की पसंद, रुचियां भी बदल रही हैं।
मुख्य अतिथि अनपरा परियोजना के महाप्रबंधक इं. एके सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि साहित्यिक विषयों से जुड़े सेमिनार एक तरह से कार्यशाला का काम करते हैं। इससे जहां शिक्षण को प्रभावी बनाने के तरीकों की जानकारी मिलती है। वहीं शिक्षण सुगम और प्रभावी होने से विद्यार्थियों की बोधगम्यता बढ़ती है। डीएवी अनपरा के प्रधानाचार्य बीके सिंह, डीएवी बीना के प्रधानाचार्य एके सिंह ने कहा कि परिवेश बदल रहा है। उसी हिसाब से विद्यार्थियों की पसंद, रुचियां भी बदल रही हैं। इसको देखते हुए समय-समय पर शिक्षण के तरीके में भी बदलाव जरूरी है, ताकि पाठ्यक्रम में रुचि बकरार रहे।
विद्यार्थियों में पुस्तक वाचन, श्रवण और लेखन की प्रतिभा के विकास पर जोर देते हुए कहा कि इस पर सतत प्रयास बनाए रखने की जरूरत है। इसके बाद विशेष विशेषज्ञों ने संबंधित विषय के शिक्षकों को बारी-बारी से शिक्षण का तरीका सरल और सुगम बनाने के टिप्स सुझाए। वरिष्ठ शिक्षक अमरेश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया और आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों की जरूरत जताई।
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मुख्य अतिथि अनपरा परियोजना के महाप्रबंधक इं. एके सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि साहित्यिक विषयों से जुड़े सेमिनार एक तरह से कार्यशाला का काम करते हैं। इससे जहां शिक्षण को प्रभावी बनाने के तरीकों की जानकारी मिलती है। वहीं शिक्षण सुगम और प्रभावी होने से विद्यार्थियों की बोधगम्यता बढ़ती है। डीएवी अनपरा के प्रधानाचार्य बीके सिंह, डीएवी बीना के प्रधानाचार्य एके सिंह ने कहा कि परिवेश बदल रहा है। उसी हिसाब से विद्यार्थियों की पसंद, रुचियां भी बदल रही हैं। इसको देखते हुए समय-समय पर शिक्षण के तरीके में भी बदलाव जरूरी है, ताकि पाठ्यक्रम में रुचि बकरार रहे।
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विद्यार्थियों में पुस्तक वाचन, श्रवण और लेखन की प्रतिभा के विकास पर जोर देते हुए कहा कि इस पर सतत प्रयास बनाए रखने की जरूरत है। इसके बाद विशेष विशेषज्ञों ने संबंधित विषय के शिक्षकों को बारी-बारी से शिक्षण का तरीका सरल और सुगम बनाने के टिप्स सुझाए। वरिष्ठ शिक्षक अमरेश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया और आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों की जरूरत जताई।
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