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जिला अस्पताल के निरीक्षण में साफ-सफाई की दुर्व्यवस्था पर बिफरे सीडीओ
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केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की गुणवत्ता निर्धारण समिति के भ्रमण के दौरान चमचमा रहे जिला अस्पताल की हकीकत चंद दिनों में ही सामने आ गई है। शुक्रवार को सीडीओ के औचक निरीक्षण में साफ-सफाई व्यवस्था में तमाम खामियां मिलीं। जनरल वार्ड में गंदगी और बेड पर गंदे चादर देख सीडीओ बिफर पड़े। कमोबेश ऐसा ही हाल पैथोलॉजी कक्ष का भी था। ओपीडी के वार्डों में भी साफ-सफाई नहीं थी। नाराज सीडीओ ने चिकित्सा अधीक्षक से जवाब तलब किया है।
सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा शुक्रवार को अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए। हेल्प डेस्क से आगे बढ़ते ही एक दरवाजा खराब मिला। भूतल पर इमरजेंसी और ओपीडी के निरीक्षण में साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। इमरजेंसी वार्ड में चार मरीज थे। प्रसवोत्तर कक्ष में तीन मरीज भर्ती थीं। पुरुष वार्ड जनरल को देखने से ही लगा रहा था कि यहां नियमित सफाई नहीं होती और न ही बेड के चादर बदले जाते हैं। सीएमएस को तत्काल इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। रेडियोलॉजी विभाग के निरीक्षण में 35 लोगों का एक्सरे करने का पंजिका पर उल्लेख था। ओपीडी में 360 मरीज पंजीकृत हुए थे। यहां निरीक्षण के दौरान फिजिशियन डॉ. एसएस पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस सिंह, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. एपी वर्मा, डेंटिस्ट मनोज उपस्थित रहे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कक्ष में ऑपरेटर सूर्या पंजिका में प्रमाण पत्रों का विवरण दर्ज नहीं कर रहा था। उसे हिदायत देकर छोड़ा। पैथालॉजी कक्ष के निरीक्षण में प्रयोगशाला सहायक उपस्थित थे लेकिन कक्ष में गंदगी थी। एनआरसी का निरीक्षण किया। यहां डॉ. रंजीता चौधरी उपस्थित थीं। दस बेड के वार्ड में दो बच्चे भर्ती मिले। इसके लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को चेतावनी देते हुए स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया। एनआईसीयू में आठ बच्चे भर्ती थे। दवा भंडार पंजिका के अनुसार 295 के सापेक्ष 72 दवाएं ही उपलब्ध थीं। इसके लिए सीडीओ ने सीएमएस से स्पष्टीकरण तलब किया।
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सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा शुक्रवार को अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए। हेल्प डेस्क से आगे बढ़ते ही एक दरवाजा खराब मिला। भूतल पर इमरजेंसी और ओपीडी के निरीक्षण में साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। इमरजेंसी वार्ड में चार मरीज थे। प्रसवोत्तर कक्ष में तीन मरीज भर्ती थीं। पुरुष वार्ड जनरल को देखने से ही लगा रहा था कि यहां नियमित सफाई नहीं होती और न ही बेड के चादर बदले जाते हैं। सीएमएस को तत्काल इसकी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। रेडियोलॉजी विभाग के निरीक्षण में 35 लोगों का एक्सरे करने का पंजिका पर उल्लेख था। ओपीडी में 360 मरीज पंजीकृत हुए थे। यहां निरीक्षण के दौरान फिजिशियन डॉ. एसएस पांडेय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस सिंह, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र कुमार, डॉ. एपी वर्मा, डेंटिस्ट मनोज उपस्थित रहे। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कक्ष में ऑपरेटर सूर्या पंजिका में प्रमाण पत्रों का विवरण दर्ज नहीं कर रहा था। उसे हिदायत देकर छोड़ा। पैथालॉजी कक्ष के निरीक्षण में प्रयोगशाला सहायक उपस्थित थे लेकिन कक्ष में गंदगी थी। एनआरसी का निरीक्षण किया। यहां डॉ. रंजीता चौधरी उपस्थित थीं। दस बेड के वार्ड में दो बच्चे भर्ती मिले। इसके लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को चेतावनी देते हुए स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया। एनआईसीयू में आठ बच्चे भर्ती थे। दवा भंडार पंजिका के अनुसार 295 के सापेक्ष 72 दवाएं ही उपलब्ध थीं। इसके लिए सीडीओ ने सीएमएस से स्पष्टीकरण तलब किया।
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