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बारह घंटे काम के करने के खिलाफ चलाएंगे अभियान
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अनपरा। श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ विभिन्न संगठनों की तरफ से अभियान चलाने की तैयारी है। काम के घंटे आठ के बजाय 12 घंटे किए जाने संबंधी प्रस्ताव को लेकर श्रमिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने काम के आठ घंटे की नियमावली में बदलाव कर उसे 12 घंटे कर दिया है। वर्कर्स फ्रंट इसके खिलाफ अभियान चलाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कारपोरेट हितों के लिए श्रमिकों के शोषण का रास्ता बना रही है। इससे देश में करीब 33 प्रतिशत कार्यरत मजदूर रोजगार से वंचित हो जाएंगे। इससे बेरोजगारी और बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि काम के घंटे बढ़ाए जाने के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के संबंध में 17 दिसंबर को वर्चुअल बैठक की जाएगी। बैठक में शामिल होने के लिए सीटू, एटक, एचएमएस, एआईसीसीटीयू और यूटीयूसी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र भेजा गया है। पत्र में संगठनों के लोगों से अभियान में शामिल होने की अपील की गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, झारखंड व उड़ीसा में असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत यूनियनों के नेताओं को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कारपोरेट हितों के लिए श्रमिकों के शोषण का रास्ता बना रही है। इससे देश में करीब 33 प्रतिशत कार्यरत मजदूर रोजगार से वंचित हो जाएंगे। इससे बेरोजगारी और बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि काम के घंटे बढ़ाए जाने के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के संबंध में 17 दिसंबर को वर्चुअल बैठक की जाएगी। बैठक में शामिल होने के लिए सीटू, एटक, एचएमएस, एआईसीसीटीयू और यूटीयूसी के केंद्रीय नेतृत्व को पत्र भेजा गया है। पत्र में संगठनों के लोगों से अभियान में शामिल होने की अपील की गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, झारखंड व उड़ीसा में असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत यूनियनों के नेताओं को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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