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मौसम की बेरुखी और नहरें भी सूखी, सिंचाई के साथ खाद का संकट

Sun, 10 Jul 2022 10:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2022 10:15 PM IST
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Bad weather and canals also dry, fertilizer crisis with irrigation
सोनभद्र। मौसम की बेरुखी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। आषाढ़ बीतने को है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। नहरों में पानी का संकट है तो दूसरी ओर पर्याप्त खाद भी नहीं मिल पा रही। निजी साधनों से फसल की सिंचाई करने वाले किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग करीब 15500 मीट्रिक टन यूरिया, डीएपी समेत अन्य खाद उपलब्ध होने का दावा कर रहा है, मगर हकीकत अलग है। कई साधन सहकारी समितियों केे सचिवों के मनमानी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। आसाढ़ माष समाप्त होने वाला है, फिर भी भगवान इंद्र मेहरबान नहीं हो रहे हैं। जरूरत के अनुसार बारिश न होने से जिले से गुजरने वाली सोन, रेणुका, बिजुल, बेलन, बकहर, कनहर समेत अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि नहीं हो पाई है। धंधरौल, नगवां, समेत अन्य जलाशयों का भी जलस्तर खिसक रहा है। इस नाते घाघर मुख्य नहर, सोन लिफ्ट, शाहगंज राजवाहा समेत अन्य नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। नहरों के चालू न होने एवं बारिश कम होने के चलते अधिकांश किसान धान की नर्सरी नहीं डाल सके हैं। वहीं बाजरा, मक्का, मकई, तिल आदि की खेतीबारी भी नाममात्र की हुई है। वहीं जिन किसानों ने निजी संसाधनों से धान की नर्सरी डालने के साथ ही अन्य फसलों की बोवाई किए है उन्हें भी जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। कई साधन सहकारी समितियों पर किसानों को उर्वरकों के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। किसान सेवा सहकारी समिति पइका पर एक छटाक खाद नहीं है। किसान सेवा सहकारी समिति पापी भी जरूरत के अनुसार खाद नहीं है। इसी तरह से कई समितियों पर खाद की कमी मुंह बाएं खड़ी है। जबकि कृषि विभाग की मानें तो जिले में खरीफ 2022 में यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी का लक्ष्य 59626 मीट्रिक टन है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 26831.97 एमटी उपलब्ध हुआ है, जिसमें से 10346.46 एमटी वितरण की जा चुकी है। अभी करीब साढ़े प्रदंह हजार मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। समितियों पर उर्वरक उपलब्ध है, लेकिन कुछ सचिवों की मनमानी के चलते समस्याएं उत्पन्न हो रही है।
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