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मौसम के करवट लेते ही पांच हजार मेगावाट लुढ़की बिजली की मांग
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सूबे में एक बार फिर बिजली की मांग 17 हजार मेगावाट के करीब पहुंच गई है। बृहस्पतिवार से सूबे के कई हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश से तापमान में कमी और बिजली कटौती के कारण मांग में कमी का अंदेशा जताया जा रहा है। इससे पूर्व बिजली की अधिकतम मांग का आंकड़ा 22 हजार मेगावाट के आसपास था। न्यूनतम मांग में लगभग सात हजार मेगावाट की गिरावट शुक्रवार को दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में तेज बारिश की शुरुआत भी हो चुकी है। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में आपातकालीन बिजली कटौती करनी पड़ी तो कई जगह खंभे और तारों के टूटने से बिजली की मांग में अचानक से कमी आई है।
नतीजा 22 हजार मेगावाट पर चल रही अधिकतम बिजली की मांग का आंकड़ा शुक्रवार को पांच हजार मेगावाट नीचे गिर कर 17362 मेगावाट दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम मांग भी 17 हजार मेगावाट से सात हजार मेगावाट नीचे गिरी और 10594 मेगावाट पहुंच गई। आगामी दो दिनों तक अन्य जिलों में भी भारी वर्षा होने के आसार जताते हुए परियोजना अधिकारी मांग में और भी कमी होने की बात कह रहे हैं। मांग में अचानक से गिरावट आने पर कई परियोजनाओं से थर्मल बेकिंग शुरू कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।
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मानसून में 16 हजार दर्ज हुई थी मांग
मानसून के सीजन में भारी बारिश से बिजली की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उन दिनों 26 हजार मेगावाट के आसपास चल रही बिजली की मांग अचानक से 10 हजार मेगावाट गिरकर 16 हजार मेगावाट पर पहुंच गई थी। इसके बाद परियोजनाओं ने तत्काल प्रभाव से इकाइयों से थर्मल बैकिंग प्रारंभ कर दिया था। जिससे स्थिति संभाली गई थी।
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मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में तेज बारिश की शुरुआत भी हो चुकी है। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में आपातकालीन बिजली कटौती करनी पड़ी तो कई जगह खंभे और तारों के टूटने से बिजली की मांग में अचानक से कमी आई है।
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नतीजा 22 हजार मेगावाट पर चल रही अधिकतम बिजली की मांग का आंकड़ा शुक्रवार को पांच हजार मेगावाट नीचे गिर कर 17362 मेगावाट दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम मांग भी 17 हजार मेगावाट से सात हजार मेगावाट नीचे गिरी और 10594 मेगावाट पहुंच गई। आगामी दो दिनों तक अन्य जिलों में भी भारी वर्षा होने के आसार जताते हुए परियोजना अधिकारी मांग में और भी कमी होने की बात कह रहे हैं। मांग में अचानक से गिरावट आने पर कई परियोजनाओं से थर्मल बेकिंग शुरू कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।
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मानसून में 16 हजार दर्ज हुई थी मांग
मानसून के सीजन में भारी बारिश से बिजली की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उन दिनों 26 हजार मेगावाट के आसपास चल रही बिजली की मांग अचानक से 10 हजार मेगावाट गिरकर 16 हजार मेगावाट पर पहुंच गई थी। इसके बाद परियोजनाओं ने तत्काल प्रभाव से इकाइयों से थर्मल बैकिंग प्रारंभ कर दिया था। जिससे स्थिति संभाली गई थी।