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जिम्मेदारों की दलील: जनसहयोग मिले तो स्वच्छता में अव्वल होगी राबर्ट्सगंज नगर पालिका

Sun, 08 Aug 2021 10:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 10:54 PM IST
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Argument of the responsible: Robertsganj Municipality will be on top in cleanliness if public cooperation is given
राबर्ट्सगंज सिविल लाइन रोड पर लगा कूड़ा डस्टबिन। संवाद - फोटो : SONBHADRA
सोनभद्र। हर कोई चाहता है कि हमारे आसपास का माहौल साफ-सुथरा रहे। नालियां साफ हों और कूड़ा डस्टबिन के बाहर न जाए। नगरीय क्षेत्र में साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। सौ से अधिक सफाई कर्मचारियों के साथ डोर-टू-डोर जाकर कूड़ा उठाने में जुटी नगर पालिका लाख कोशिशों के बाद भी स्वच्छता अभियान में फिसड्डी साबित हो रही है। जिम्मेदार संसाधनों की कमी का रोना रो रहे हैं। मानक के अनुरूप सफाई कर्मचारी नहीं हैं और न ही पर्याप्त कूड़ा वाहन। इन सबके बावजूद व्यवस्था में थोड़ा बदलाव हो और जिम्मेदार नागरिक की तरह हम सब भी खुद को बदलने की थोड़ी कोशिश करें तो अन्य शहरों की तरह स्वच्छता में हम भी अव्वल रह सकते हैं। बदलाव बस कुछ आदतों में। टोका-टाकी और आत्म नियंत्रण से राबर्ट्सगंज नगर पालिका को हम स्वच्छता में आगे ले जा सकते हैं।
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नगर पालिका की यह मजबूरी
तेजी से बढ़ते नगरीय क्षेत्र की मौजूदा आबादी करीब 50 हजार है। वर्षों पुराने मानक के तहत प्रत्येक दस हजार आबादी पर कम से कम 28 सफाई कर्मचारियों की जरुरत होती है। इसके सापेक्ष नगर पालिका में कुल 104 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें भी ज्यादातर संविदा और आउट सोर्सिंग के हैं। इन्हीं में से 25 सफाई कर्मचारियों को 25 वार्डों में सफाई नायक का भी काम सौंपा गया है। कूड़ा उठाने के लिए लोडर, टीपर, ट्रैक्टर लगाए गए हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले चालकों की कमी है। करीब 15 चालकों का पद खाली है। जगह-जगह लगाए गए लोहे के कांपैक्टर डस्टबिन शरारती तत्वों ने तोड़ दिया है। किसी का ढक्कन नशेड़ी उठा ले गए तो कहीं मनबढ़ों ने उसे तहस-नहस कर दिया। कुछ इलाकों में नालियों पर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। इससे नियमित सफाई नहीं होती और बराबर विवाद की स्थिति भी बनती है।
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जनसहयोग इसलिए जरूरी
सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रोजाना सुबह छह बजे तक सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाते हैं। इसके बाद जगह-जगह एकत्रित कूड़े को उठाने का क्रम शुरू होता है। आधे से अधिक शहर में जब सफाई और कूड़ा उठाने का अभियान शुरू हो जाता है, तब दुकानें खुलने पर लोग कूड़ा बाहर निकालना शुरू करते हैं। नतीजा दस बजते-बजते फिर से बाजार में जगह-जगह कूड़े का ढेर लग जाता है। दुकान बंद करते वक्त ही सफाई कर कूड़ा बाहर निकालने से सहूलियत हो सकती है। इसके अलावा घरों में गीला और सूखा कचरा अलग रखने की व्यवस्था से भी सहयोग दे सकते हैं। कूड़ा सिर्फ डस्टबिन में डालें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हुए दूर से बाहर कूड़ा डालने वालों पर सख्ती से ही काफी सुधार हो सकता है।
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