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Sonebhadra News: बगैर अनुमति मुख्यालय पर मनमाने तरीके से प्लाटिंग, हर माह राजस्व को लगाया जा रहा लाखों का चूना

Tue, 20 Jan 2026 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 01:38 AM IST
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Arbitrary plotting at the headquarters without permission, causing loss of lakhs of rupees to the revenue every month.
कहीं भी कालोनियां बसाने या प्लाटिंग के लिए पहले जरूरी सुविधाएं, इसके बाद उसका नक्शा पास कराया जाना जरूरी है..। बावजूद इसके सोनभद्र में प्लाटिंग से जुड़े नियम बेमानी बने हुए हैं। दूसरे क्षेत्रों की कौन कहे, महज मुख्यालय क्षेत्र में ही अवैध तरीके से प्लाटिंग का खेल चल जा रहा है। सोशल मीडिया पर फर्म-कंपनी का लोगों लगाकर प्लाटिंग वाली जमीन का जमकर प्रचार किया जा रहा है। फिर भी न तो कहीं सड़क, बिजली, सीवर लाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं न ही संबंधित स्थल के नक्शा मंजूरी का ही कोई आवेदन विनियमित क्षेत्र विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है। महज किसानों से इकरारनामा कराकर प्लाटिंग का खेल खेलने और जमीन खरीदार को सीधे काश्तकार (भू स्वामी) से जमीन बैनामा कराकर हर माह सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
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बताते चलें कि जिले में इन दिनों प्लाटिंग की बाढ़ सी आई है। सिर्फ शहरों में ही नहीं गांवों में सुविधा से युक्त इलाके में प्लाट उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। इसके लिए तरह-तरह की आकर्षक स्कीमों का लालच दिए जाने के साथ ही, लोगों से प्लाटिंग के नाम पर जमीन की सामान्य दर से ऊंची कीमत भी वसूल की जा रही है। मोटे मुनाफे के इस खेल में सरकारी राजस्व को भी हर माह अच्छा-खासा चूना लगाया जा रहा है। सरकार को किसी तरह के टैक्स की अदायगी न करनी पड़े न ही संबंधित स्थल पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विवश होना पड़े, इसके लिए एक भी कथित फर्मों की तरफ से नक्शा पास करने के लिए अब तक एक भी आवेदन विनियमित प्राधिकरण के पास नहीं पहुंच सका है। न ही प्लाटिंग फर्मों के बाबत ही कहीं किसी विभाग या जिम्मेदार के पास कोई सूचना उपलब्ध है। इसका फायदा उठाकर किसानों से जमीन की इकरारनामा कराया जा रहा है और जमीनों में ईंट का घेरा बनाकर प्लाटिंग की रूपरेखा बनाई जा रही है और इन प्लाटों को किसानों के जरिए सीधे खरीदार को जमीन बेच दी जा रही है। कई प्लाटों पर फर्मों के बोर्ड भी लगे दिख रहे हैं। बावजूद बगैर पंजीयन, बगैर अनुमति प्लाटिंग कर कालोनी विकसित करने के नियमों की धज्जियां तो उड़ाई ही जा रही हैं। किसानों से जमीन का बैनामा कराकर सरकार को स्टांप ड्यूटी के जरिए मिलने वाले राजस्व को भी अच्छी-खासी चपत पहुंचाई जा रही है।
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