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Sonebhadra News: दर्शनार्थियों से भरा ऑटो पलटा, बेटे की मौत, मां समेत दस घायल
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कोन। स्थानीय थाना के चकरिया चौकी क्षेत्र स्थित अमिला धाम के पास घाटी में श्रद्धालुओं से भरा ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में बेटे की मौत हो गई, जबकि उसकी मां समेत दस लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें कोन सीएचसी में भर्ती कराया गया है।
बिहार के रोहतास जिले के माधा गांव निवासी एक परिवार के लोग बृहस्पतिवार की सुबह ऑटो रिजर्व करके अमिला धाम दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन-पूजन के बाद सभी ने खाना बनाया और खाया। दोपहर बाद वह लौट रहे थे। घाटी पर कुछ ही दूर आगे बढ़ने पर ऑटो अनियंत्रित होकर खाई में चला गया। हादसे में ऑटो सवार प्रमोद राजवार (42) की मौके पर ही मौत हो गयी। ऑटो में सवार उसकी मां सहती कुंवर (56), रघुनाथ (35), बुधनी (45), धनंजय उरांव, बुद्धु राजवार (50), लालती देवी (58), सविता देवी (30), रितू (5) घायल हो गए। घायल बुद्धू राजवार, धनंजय उरांव ने बताया कि उन्हे एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली। दर्शन करने आए लोगों ने अपनी पिकअप से सभी को अस्पताल पहुंचाया। वहां उनका उपचार चल रहा है। कोन पुलिस शव के पोस्टमार्टम की कार्रवाई में जुटी है। एसआई रामगोविंद यादव ने बताया कि ऑटो को चकरिया चौकी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
फर्श पर हुआ घायलों का उपचार
सड़क हादसे में जिले के स्वास्थ्य सेवाओं के खोखले दावों की पोल खुल गई। एक ओर जहां घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिली। जब राहगीरों ने पिकअप में बैठाकर घायलों को सीएचसी कोन पहुंचाया तो यहां घायलों को दुर्व्यवस्था से जूझना पड़ा। सीएचसी कोन में संसाधनों के अभाव में सभी घायलों को फर्श पर लिटाया गया। जमीन पर ही चिकित्सक की ओर से घायलों का उपचार किया। अस्पताल में बिजली नहीं होने के कारण बाहर ही फर्श पर लेटकर मरीज कराह रहे हैं। अस्पताल में इमरजेंसी की सुविधा न के बराबर है। अस्पताल जब घायल पहुंचे जो सभी कर्मी घायल थे। महज एक चिकित्सक किसी तरह उपचार करते रहे।
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बिहार के रोहतास जिले के माधा गांव निवासी एक परिवार के लोग बृहस्पतिवार की सुबह ऑटो रिजर्व करके अमिला धाम दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन-पूजन के बाद सभी ने खाना बनाया और खाया। दोपहर बाद वह लौट रहे थे। घाटी पर कुछ ही दूर आगे बढ़ने पर ऑटो अनियंत्रित होकर खाई में चला गया। हादसे में ऑटो सवार प्रमोद राजवार (42) की मौके पर ही मौत हो गयी। ऑटो में सवार उसकी मां सहती कुंवर (56), रघुनाथ (35), बुधनी (45), धनंजय उरांव, बुद्धु राजवार (50), लालती देवी (58), सविता देवी (30), रितू (5) घायल हो गए। घायल बुद्धू राजवार, धनंजय उरांव ने बताया कि उन्हे एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली। दर्शन करने आए लोगों ने अपनी पिकअप से सभी को अस्पताल पहुंचाया। वहां उनका उपचार चल रहा है। कोन पुलिस शव के पोस्टमार्टम की कार्रवाई में जुटी है। एसआई रामगोविंद यादव ने बताया कि ऑटो को चकरिया चौकी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।
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फर्श पर हुआ घायलों का उपचार
सड़क हादसे में जिले के स्वास्थ्य सेवाओं के खोखले दावों की पोल खुल गई। एक ओर जहां घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिली। जब राहगीरों ने पिकअप में बैठाकर घायलों को सीएचसी कोन पहुंचाया तो यहां घायलों को दुर्व्यवस्था से जूझना पड़ा। सीएचसी कोन में संसाधनों के अभाव में सभी घायलों को फर्श पर लिटाया गया। जमीन पर ही चिकित्सक की ओर से घायलों का उपचार किया। अस्पताल में बिजली नहीं होने के कारण बाहर ही फर्श पर लेटकर मरीज कराह रहे हैं। अस्पताल में इमरजेंसी की सुविधा न के बराबर है। अस्पताल जब घायल पहुंचे जो सभी कर्मी घायल थे। महज एक चिकित्सक किसी तरह उपचार करते रहे।
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