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Sonebhadra News: श्री गुरु सिंह सभा हुआ में अखंड पाठ शबद कीर्तन, श्रद्धालुओं ने छका लंगर
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रॉबर्ट्सगंज गुरु सिंह सभा में बैशाखी पर सजा गुरु ग्रंथ का दिवान। स्रोत स्वयं
सोनभद्र। जिले में मंगलवार को खालसा जन्म उत्सव (बैसाखी) उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। रॉबर्ट्सगंज स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में अखंड पाठ और शबद कीर्तन का आयोजन किया गया।
सुबह 10 बजे तक अखंड पाठ के बाद सुरजन सिंह और दया सिंह ने कीर्तन की प्रस्तुति दी। इसके बाद वाराणसी से आए रकम सिंह और उनकी टोली ने जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद छका।
जसकीरत सिंह ने बताया कि बैसाखी के दिन ही 1699 में सिखों के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहब में खालसा पंथ की नींव रखी थी और डरी सहमी जनता के अंतर्गन में अमृत संचार कर उनके डर को समाप्त किया था। अजीत सिंह और प्रीतपाल सिंह ने बताया कि बैसाखी पर्व के समय घर में आने वाली नई फसल किसानों में खुशी का संचार करती है।
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इसलिए भी यह पर्व काफी खास है। देवेंद्र सिंह और बलकार सिंह ने कहा कि 1919 में अंग्रेजों ने बैसाखी के दिन ही जलियांवाला कांड को अंजाम दिया था। यही कारण है कि यह दिन हमें आजादी के लिए दिए गए बलिदान की भी याद दिलाता है। संतोष सिंह और बलकार सिंह ने कहा कि यह दिन कई मायने में खास है।
गुरु गोबिंद सिंह ने न केवल साहस और वीरता का संदेश दिया। अपने असीम साहस, दृढ़ संकल्प से समाज को एक नई धारा की तरफ मोड़ दिया।
इस दौरान विशन सिंह, पृथीपाल सिंह, पारब्रहम सिंह, चरनजीत सिंह, रविंदर सिंह, तजिंदर पाल सिंह, मनमीत सिंह, दया सिंह आदि ने कार्यक्रम में सहयोग दिया। कमलेश सिंह खांभे आदि मौजूद रहे।
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सुबह 10 बजे तक अखंड पाठ के बाद सुरजन सिंह और दया सिंह ने कीर्तन की प्रस्तुति दी। इसके बाद वाराणसी से आए रकम सिंह और उनकी टोली ने जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद छका।
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जसकीरत सिंह ने बताया कि बैसाखी के दिन ही 1699 में सिखों के 10वें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहब में खालसा पंथ की नींव रखी थी और डरी सहमी जनता के अंतर्गन में अमृत संचार कर उनके डर को समाप्त किया था। अजीत सिंह और प्रीतपाल सिंह ने बताया कि बैसाखी पर्व के समय घर में आने वाली नई फसल किसानों में खुशी का संचार करती है।
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इसलिए भी यह पर्व काफी खास है। देवेंद्र सिंह और बलकार सिंह ने कहा कि 1919 में अंग्रेजों ने बैसाखी के दिन ही जलियांवाला कांड को अंजाम दिया था। यही कारण है कि यह दिन हमें आजादी के लिए दिए गए बलिदान की भी याद दिलाता है। संतोष सिंह और बलकार सिंह ने कहा कि यह दिन कई मायने में खास है।
गुरु गोबिंद सिंह ने न केवल साहस और वीरता का संदेश दिया। अपने असीम साहस, दृढ़ संकल्प से समाज को एक नई धारा की तरफ मोड़ दिया।
इस दौरान विशन सिंह, पृथीपाल सिंह, पारब्रहम सिंह, चरनजीत सिंह, रविंदर सिंह, तजिंदर पाल सिंह, मनमीत सिंह, दया सिंह आदि ने कार्यक्रम में सहयोग दिया। कमलेश सिंह खांभे आदि मौजूद रहे।