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Sonebhadra News: फेफड़ों में कैंसर और ब्रोंकाइटिस का कारण बन रहा वायु प्रदूषण

Tue, 20 Dec 2022 04:30 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2022 04:30 AM IST
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air pollution causing lung cancer and bronchitis
अनपरा। प्रदेश के जिन 17 शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को सरकार ने गंभीर माना है, उसमें अनपरा भी शामिल है। ऊर्जांचल की परियोजनाओं से उड़ रहे राख और कोयले के कण से प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है। हवा में घुले यह कण फेफड़ों में पहुंचकर कई बीमारियों के कारण बन रहे हैं। लगातार ऐसे वातावरण में रहते हुए सांस लेने से अस्थमा, कैंसर व ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारी हो सकती है। फेफड़े की हवा थैलियों में सूजन या सांस की नली में सूजन जैसे बीमारी तेजी से बढ़ रही है।
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अनपरा-शक्तिनगर से सटे सिंगरौली परिक्षेत्र में सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 360 से 375 तक रहा। विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण का यह स्तर सेहत के लिए घातक है। इससे सांस से जुड़ी बीमारियों के साथ दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। जहरीली हवा के महीन कण पीएम 2.5 खून में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे धमनियों में सूजन आने लगती है और फिर दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। तीव्र संक्रमण से बच्चों को सांस लेने में भी कठिनाई होती है। जानकारी के अभाव में यह कम उम्र में ही बच्चों के मौत का कारण भी बन जाता है। इन बीमारियों से बचने के लिए प्रदूषित इलाकों में आवाजाही से बचना आवश्यक है।
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मास्क को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
अनपरा स्थित सद्भावना अस्पताल के चिकित्सक डॉ आरएन सिंह के अनुसार वायु में घुले प्रदूषण के कण नाक, आंख और मुंह से ही शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं। इसके लिए अनपरा से शक्तिनगर के क्षेत्रों में सफर करने या घर से बाहर निकलने पर भी मास्क बेहद आवश्यक है। बाहर से घर में प्रवेश करने के बाद अच्छे से हाथ-पैर की साफ-सफाई या स्नान से ही सुरक्षित रहा जा सकता है। प्रतिदिन रात में सोने से पूर्व गुड़ खाना भी फायदेमंद साबित होगा। इससे बीमार होने का खतरा 60 प्रतिशत तक कम होगा।
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भाप लेने से भी साफ होते हैं प्रदूषण के सूक्ष्म कण
रेणुसागर हिंडाल्को परियोजना के चिकित्सक डॉ. एके दुबे ने बताया कि सांस और मुंह के माध्यम से शरीर में गए कणों को भाप की सहायता से भी समाप्त किया जा सकता है। नियमित घर वापसी के बाद 10 से 15 मिनट तक नियमित भाप लेने से भी प्रदूषण के खतरों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा अगर ब्रोंकाइटिस से मरीज ग्रसित हो चुका है तो भाप लेने से सांस लेने में होने वाली कठिनाइयों से भी निजात मिलेगी। पांच वर्ष से कम के बच्चों के लिए आवश्यक है कि बेवजह उन्हें खुली हवा में न लेकर जाए। परिक्षेत्र का लंबा हिस्सा प्रदूषित है। इस कारण आसपास में बसे गांवों तक भी प्रदूषण फैलता है।

प्राणायाम और नियमित काढ़ा फायदेमंद
डिबुलगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. बीके सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में रहने के लिए व्यायाम और काढ़ा का नियमित प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। सभी जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा का सेवन करने से शरीर के अंदर पहुंचे प्रदूषण को भी दूर किया जा सकता है। प्रदूषण का खतरा अधिक होने पर बेहद आवश्यकता पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलना चाहिए। इसके साथ ही गुड़ का सेवन करने से शरीर के अंदर तक पहुंचे प्रदूषण को भी साफ किया जा सकता है।
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