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Sonebhadra News: स्कूलों के विलय के बाद कहीं तीन तो कहीं दो किमी दूर पढ़ने जाएंगे नौनिहाल

Thu, 03 Jul 2025 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jul 2025 11:27 PM IST
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After the merger of schools, children will have to go to study three or two kilometers away
सोनभद्र। कम नामांकन वाले विद्यालयों को नजदीकी दूसरे विद्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया विभाग के लिए भले ही सुकून वाली हो, लेकिन बच्चों के लिए यह परेशानी खड़ी करने वाली है। वृहद भौगोलिक क्षेत्रफल वाले जिले के अंदर इस प्रक्रिया ने सबको शिक्षित करने के अभियान के लिए चुनौती बढ़ा दी है। पहले चरण में जिन 18 विद्यालयों का विलय हुआ है, वहां के बच्चों को अब ढाई से तीन किमी दूर पढ़ने जाना होगा। इन इलाकों में आवागमन के साधन भी सुलभ नहीं हैं। ऐसे में बच्चों का नियमित समय से स्कूल पहुंच पाना आसान नहीं होगा।
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नीति आयोग ने सोनभद्र जिन मापदंडों के आधार पर देश के 112 अति पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा है, उसमें बुनियादी शिक्षा सबसे अहम है। आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों तक अच्छी शिक्षा पहुंचाने के लिए तमाम जतन किए जा रहे हैं। बिखरी आबादी के बीच विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और ड्राप आउट रोकने के लिए पास-पास स्कूल खोले गए थे। अब नई प्रक्रिया में कम नामांकन वाले विद्यालयों को दूसरे में मर्ज किया जा रहा है। जिले में 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय स्कूलों की संख्या आठ सौ के करीब है। इनमें भी 25 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की संख्या सौ के करीब है। स्कूलों के विलय के लिए एक किलोमीटर की दूरी का मानक रखा गया है। इसके लिए अभिभावकों से सहमति पत्र भी लिया जा रहा है।पहले चरण में 18 स्कूलों का विलय हो चुका है। इन स्कूलों की स्थिति पर गौर करें तो भविष्य में नौनिहालाें के लिए शिक्षा की राह में चुनौती साफ नजर आएगी। कई स्कूलों को डेढ़ से ढाई किमी दूरी वाले स्कूलों में विलय किया गया है। यहां नामांकित बच्चों के लिए पैदल ही आवागमन करना पड़ेगा। प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ले वाले बच्चे रोज इतनी दूरी तक अकेले पैदल कैसे तय कर पाएंगे, यह गंभीर प्रश्न है।
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प्राथमिक विद्यालय महुअरिया को कंपोजिट विद्यालय करकोली से विलय किया गया है। इन दोनाें स्कूलों के बीच की दूरी करीब ढाई से तीन किमी के बीच है। ऐसे में बच्चों को विद्यालय जाने के लिए काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
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चतरा के प्राथमिक विद्यालय संडा को प्राथमिक विद्यालय हिरनखुरी से विलय किया गया है। दोनों विद्यालयों की आपस में दूरी डेढ़ किमी से अधिक है। दोनों गांवोंं के बीच करीब पांच सौ मीटर सड़क कच्ची है। जिससे होकर बच्चों को स्कूल जाना होगा।
करमा ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय मदैनिया को कंपोजिट विद्यालय करमा से विलय किया गया है। इन दोनों स्कूलों के मध्य दूरी करीब दो किमी है। इससे बच्चों को करीब दो से ढाई किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
घोरावल ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हरिहरपुर को प्राथमिक विद्यालय दुरावल खुर्द से जोड़ा गया है। इनकी दूरी डेढ़ किमी है। ऐसे में बच्चों को दो किमी तक का सफर तय करना होगा।
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बिना मान्यता वाले निजी स्कूलों पर विभाग मौन
एक तरफ परिषदीय विद्यालयों को कम नामांकन की दलील देकर मर्ज किया जा रहा है तो दूसरी ओर गांवों में बिना मान्यता चल रहे विद्यालयाें पर विभाग मौन है। जिले में कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक करीब 526 निजी विद्यालयाें को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मान्यता दी गई है। इनमें सैकड़ाें स्कूल मान्यता के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इन स्कूलाें में योग्य शिक्षकों के साथ ही संसाधनों के मानक पूरे नहीं हैं। इनके प्रभाव में ग्रामीण इलाकों के बच्चे सरकारी स्कूलों से खुद को हटाकर निजी में दाखिला करा रहे हैं। इन स्कूलों की चकाचौंध ऐसी है कि सरकारी स्कूलों में बीएड, बीटीसी और टीईटी पास शिक्षकों से शिक्षा लेने की बजाय बच्चे निजी स्कूलों में इंटर और बीए पास शिक्षक नियुक्त लोगों से पढाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं मान्यता प्राप्त स्कूलों से इतर भी बड़ी संख्या में बिना मान्यता के स्कूल भी चल रहे हैं। यह विद्यालय भी सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन में बाधक साबित हो रहे हैं।
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निजी और सरकारी स्कूलों में जोर आजमाइस
कई निजी स्कूलों की ओर से तरह-तरह के प्रलोभन देकर अहम जानकारियां छिपाई जा रही हैं। कई स्कूलों की तो किसी बोर्ड से संबद्धता भी नहीं है लेकिन अपने गेट और प्रचार में वह इस तरह से बोर्ड का नाम लिखते हैं कि लोग धोखा खा जाते हैं। विभिन्न स्कूल कई तरीकों से बोर्ड का नाम लिखकर अभिभावकों को गुमराह करते हैं।

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वर्जन...
जिले में कुछ स्कूलों का विलय किया गया है। इसके लिए मानकों और बच्चों की सहूलियत का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अगर मानकों के विपरीत स्कूलों के संचालन की बात आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए।
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