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Sonebhadra News: सफलता पाने के लिए सिर्फ अच्छे अंक नहीं, काबिलियत की जरूरत

Sat, 25 Apr 2026 11:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:53 PM IST
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Achieving success requires capability, not just good grades.
मॉ वैष्णो मॉडन प​ब्लिक स्कूल में अमर उजाला की आर से नई दिशा कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी। संवा
सोनभद्र। जीवन में सफल होना है तो खुद को काबिल बनाना होगा। सिर्फ अंकों के पीछे भागने से सफलता नहीं मिलती। अंक किसी प्रतियोगिता के दरवाजे तक ले जा सकते हैं, लेकिन आगे इंटरव्यू में काबिलियत ही काम आती है। शनिवार को अमर उजाला के नई दिशा: भविष्य की ओर पहला कदम कार्यक्रम में प्रधानाचार्य श्रवण कुमार पांडेय ने मौजूद 250 से अधिक विद्यार्थियों को यह संदेश दिया।
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परासी पांडेय स्थित मां वैष्णो मॉडर्न स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानाचार्य श्रवण कुमार पांडेय ने सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर जैसे अन्य उदाहरणों से समझाया कि ऐसी तमाम हस्तियां हुई जो कभी मेरिट में नहीं आ सके, लेकिन सारी दुनिया में अपने हुनर का लोहा मनवाने में कामयाब रहे।
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विषय को रटकर कुछ समय तक के लिए याद रखा जा सकता है, लेकिन अगर उसे समझकर पढ़ा जाए तो वह कभी नहीं भूलता। परीक्षा में नंबर सिर्फ यह बताता है कि निर्धारित समय में कितना पढ़कर याद रखा गया। इससे किसी छात्र की योग्यता या अयोग्यता तय नहीं होती। हर विद्यार्थी अपने आप में खास है।
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अपनी क्षमता को पहचानिए और उसे निखारिए। अंकों के फेर में पड़कर नकारात्मकता में जाना सही नहीं है। अगर किसी परीक्षा में असफलता मिलती है या नंबर कम आता है तो इसका मतलब असफलता नहीं, बल्कि सीखने का अवसर है। इससे धैर्य और संघर्ष की क्षमता विकसित होती है। मायूस होने की बजाए सकारात्मक दृष्टि से सोचें।
मन-मस्तिष्क से खुद को मजबूत बनाएं। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों पर अंकों का दबाव न देने और उनकी इच्छा के अनुरूप क्षेत्र चुनने का मौका देने की जरूरत बताई। एकेडमिक हेड अक्षय राज मिश्र ने कहा कि अंकों का अत्यधिक दबाव बच्चों में तनाव और चिंता बढ़ाता है। कई बार यह आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है।

नई शिक्षा नीति भी स्किल, क्रिएटिविटी और इनोवेशन को अधिक महत्व देती है। अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने बच्चों को नियमित अखबार का अध्ययन करने की सलाह दी। कहा कि अखबार सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। यह संवाद और लेखन का सही तरीका भी सिखाता है। कार्यक्रम में शिक्षक नासिर अहमद, धीरज देव पांडेय, विभोर पांडेय, नीरज पांडेय, पवन गिरि, अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
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