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मरीज को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने की जांच शुरू
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सोनभद्र। सड़क हादसे में एक अक्टूबर 2018 को निपराज गांव निवासी राजेंद्र का बेटा जय प्रकाश घायल हो गया था। घायल को उसके घरवाले जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने घायल को ट्रामा सेंटर वाराणसी रेफर कर दिया। लेकिन बिचौलियों के माध्यम से एंबुलेंस कर्मी घायल को ट्रामा सेंटर ले जाने की बजाय अपनी सेटिंग वाले प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। यहां उपचार के नाम पर घायल ये 60 हजार लिया गया। घायल के पिता ने एसपी को खिलाफ शिकायती पत्र दिया। एसपी किरीट राठोड ने राबर्ट्सगंज कोतवाल को मामले की जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र मेें रायपुर थाना क्षेत्र के निपराज निवासी राजेंद्र ने लिखा है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसके बेटे जय प्रकाश को एंबुलेंस से ट्रामा सेंटर भेजा था। लेकिन एंबुलेंस कर्मी ट्रामा सेंटर ले जाने के बजाय अपने सेटिंग वाले अस्पताल में घायल को ले जाकर भर्ती कराकर वहां से चले गए। अस्पताल कर्मियों ने घायल का ऑपरेशन करने के नाम पर 1500 हजार जमा कराया। दूसरे दिन 60 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। उसने रुपये देने का विरोध किया तो अस्पताल के डॉक्टर समेत अन्य कर्मियों ने गाली देते हुए कहा कि लड़के को जिंदा देखना चाहता तो पैसा जमा करो, तब लड़का मिलेगा। उसने अपना खेत रेहन रख कर 45 हजार जमा किया। फिर दो दिन बाद 20 हजार की मांग की गई। रुपये देने में असमर्थता जताया तो उन लोगों ने बेटे को बंधक बना लिया। अस्पताल से निकल कर उसने नजदीकी थाने पहुंच कर आपबीती सुनाई। एक पुलिसकर्मी से नंबर लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों को बेटे के बंधक बनाने की सूचना दी। अधिकारियों ने अस्पताल से बच्चे को मुक्त कराया। पुलिस का कहना है कि जांच में शिकायत सही मिलने पर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर कोई शिकायत करेगा तो जांच करवा कर कार्रवाई करेंगे।
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एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र मेें रायपुर थाना क्षेत्र के निपराज निवासी राजेंद्र ने लिखा है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसके बेटे जय प्रकाश को एंबुलेंस से ट्रामा सेंटर भेजा था। लेकिन एंबुलेंस कर्मी ट्रामा सेंटर ले जाने के बजाय अपने सेटिंग वाले अस्पताल में घायल को ले जाकर भर्ती कराकर वहां से चले गए। अस्पताल कर्मियों ने घायल का ऑपरेशन करने के नाम पर 1500 हजार जमा कराया। दूसरे दिन 60 हजार रुपये जमा करने के लिए कहा गया। उसने रुपये देने का विरोध किया तो अस्पताल के डॉक्टर समेत अन्य कर्मियों ने गाली देते हुए कहा कि लड़के को जिंदा देखना चाहता तो पैसा जमा करो, तब लड़का मिलेगा। उसने अपना खेत रेहन रख कर 45 हजार जमा किया। फिर दो दिन बाद 20 हजार की मांग की गई। रुपये देने में असमर्थता जताया तो उन लोगों ने बेटे को बंधक बना लिया। अस्पताल से निकल कर उसने नजदीकी थाने पहुंच कर आपबीती सुनाई। एक पुलिसकर्मी से नंबर लेकर पुलिस के उच्चाधिकारियों को बेटे के बंधक बनाने की सूचना दी। अधिकारियों ने अस्पताल से बच्चे को मुक्त कराया। पुलिस का कहना है कि जांच में शिकायत सही मिलने पर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर कोई शिकायत करेगा तो जांच करवा कर कार्रवाई करेंगे।
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