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सामाजिक बुराइयों को दूर करने का करें प्रयत्न
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:54 AM IST
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अनपरा। उर्जांचल में बुधवार को विभिन्न स्थानों पर शरद पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। अनपरा कॉलोनी परिसर स्थित डॉ. अंबेडकर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज अनपरा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अनपरा नगर के स्वयंसेवकों ने शरद पूर्णिमा का कार्यक्रम मनाया ।
मुख्य वक्ता विभाग कार्यवाह पुनीत लाल ने कहा कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों से ऊर्जा में अभिवृद्धि होती है। संघ के स्वयंसेवकों को ऊर्जा प्राप्त करके देश में व्याप्त अस्पृश्यता, नशाखोरी तथा अशिक्षा जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयत्नशील होना चाहिए। एनसीएल बीना परियोजना आवासीय परिसर स्थिति श्री राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में बुधवार को शरद पूर्णिमा मनाई गई। सुबह से लोग पूजन-अर्चन, दान-पुण्य कर सुख समृद्धि की कामना की, वही सरोवर घाट दीपों से जगमगा उठा। मंदिर के पुजारी एस माधवन नायर ने बताया कि पूर्णिमा हिंदू त्यौहारों में से एक है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सभी सोलह कलाओं के साथ पृथ्वी के नजदीक होता है। भगवान विष्णु के अवतारों में से केवल भगवान श्री कृष्ण ही हैं, जिनमें सोलह कलाओं का समावेश है, जबकि भगवान राम का जन्म केवल बारह कलाओं के साथ हुआ था। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कृष्ण ने दिव्य प्रेम और नृत्य के संगम महारास को स्वयं वृंदावन में रचा था। इसलिए बृज क्षेत्र में, शरद पूर्णिमा को रस पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर नगर कार्यवाह रामनरेश, सह नगर कार्यवाह प्रदीप कालडा, सह जिला शारीरिक प्रमुख बंशधारी, सह जिला प्रचार प्रमुख राकेश कुमार राय, नगर बौद्धिक प्रमुख सतीश कुमार सिंह, नगर शारीरिक प्रमुख सुदामा प्रसाद, नगर प्रचार प्रमुख अशोक कुमार सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मुख्य वक्ता विभाग कार्यवाह पुनीत लाल ने कहा कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों से ऊर्जा में अभिवृद्धि होती है। संघ के स्वयंसेवकों को ऊर्जा प्राप्त करके देश में व्याप्त अस्पृश्यता, नशाखोरी तथा अशिक्षा जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए सतत प्रयत्नशील होना चाहिए। एनसीएल बीना परियोजना आवासीय परिसर स्थिति श्री राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में बुधवार को शरद पूर्णिमा मनाई गई। सुबह से लोग पूजन-अर्चन, दान-पुण्य कर सुख समृद्धि की कामना की, वही सरोवर घाट दीपों से जगमगा उठा। मंदिर के पुजारी एस माधवन नायर ने बताया कि पूर्णिमा हिंदू त्यौहारों में से एक है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सभी सोलह कलाओं के साथ पृथ्वी के नजदीक होता है। भगवान विष्णु के अवतारों में से केवल भगवान श्री कृष्ण ही हैं, जिनमें सोलह कलाओं का समावेश है, जबकि भगवान राम का जन्म केवल बारह कलाओं के साथ हुआ था। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कृष्ण ने दिव्य प्रेम और नृत्य के संगम महारास को स्वयं वृंदावन में रचा था। इसलिए बृज क्षेत्र में, शरद पूर्णिमा को रस पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर नगर कार्यवाह रामनरेश, सह नगर कार्यवाह प्रदीप कालडा, सह जिला शारीरिक प्रमुख बंशधारी, सह जिला प्रचार प्रमुख राकेश कुमार राय, नगर बौद्धिक प्रमुख सतीश कुमार सिंह, नगर शारीरिक प्रमुख सुदामा प्रसाद, नगर प्रचार प्रमुख अशोक कुमार सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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