{"_id":"5aaab51b4f1c1b91778b5a99","slug":"71521136923-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"करमा और शैला नृत्य के जरिए दिखाई लोक संस्कृति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करमा और शैला नृत्य के जरिए दिखाई लोक संस्कृति
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र (बभनी)। सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम चपकी कारीडांड़ बुधवार की शाम लोक नृत्य की धूम रही। कलाकारों ने करमा और शैला नृत्य की शानदार प्रस्तुति कर आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाई। सारंगी की धुन और बच्चों के लोक गीत ने लोगों की खूब वाहवाही लूटी।
कारीडांड़ में बुधवार की शाम वनवासी समागम का आयोजन किया गया। इसमें कई गांवों की नृत्य टोली ने हिस्सा लिया। करमा और शैला नृत्य की 18 टीमें रहीं। कलाकारों ने मृदंग, सारंगी का भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में गोरखपुर व हरियाणा के कल्याण आश्रम के सदस्य भी रहे। मुख्य अतिथि प्रांत मंत्री गोरखपुर हरे कृष्ण एवं विशिष्ट अतिथि महेंद्र कुमार रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि सेवा समर्पण संस्थान कारीडांड़ आश्रम अब भी पुरानी कला और संस्कृति को संजोकर रखा है। इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कर्मा नृत्य और शैला नृत्य मशहूर है। यहां के आदिवासी करमदेव की पूजा करते हैं। वे जब करमदेव की पूजा करते हैं तो पूरी रात कर्मा नृत्य करते हैं। यही परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है। इस परंपरा को सेवाकुंज बखूबी चला रहा है। कार्यक्रम में सतवहनी, सालेनाग, राजासरई, बिछियारी, रंपाकुरर, डूमरहर, करमघट्टी, हथियार, नधिरा, करमहलटोला की टीमों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान डॉ. सुबोध चंद्र वर्मा, आनंद, अमरदेव पांडेय मौजूद रहे।
विज्ञापन
कारीडांड़ में बुधवार की शाम वनवासी समागम का आयोजन किया गया। इसमें कई गांवों की नृत्य टोली ने हिस्सा लिया। करमा और शैला नृत्य की 18 टीमें रहीं। कलाकारों ने मृदंग, सारंगी का भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में गोरखपुर व हरियाणा के कल्याण आश्रम के सदस्य भी रहे। मुख्य अतिथि प्रांत मंत्री गोरखपुर हरे कृष्ण एवं विशिष्ट अतिथि महेंद्र कुमार रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि सेवा समर्पण संस्थान कारीडांड़ आश्रम अब भी पुरानी कला और संस्कृति को संजोकर रखा है। इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कर्मा नृत्य और शैला नृत्य मशहूर है। यहां के आदिवासी करमदेव की पूजा करते हैं। वे जब करमदेव की पूजा करते हैं तो पूरी रात कर्मा नृत्य करते हैं। यही परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है। इस परंपरा को सेवाकुंज बखूबी चला रहा है। कार्यक्रम में सतवहनी, सालेनाग, राजासरई, बिछियारी, रंपाकुरर, डूमरहर, करमघट्टी, हथियार, नधिरा, करमहलटोला की टीमों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान डॉ. सुबोध चंद्र वर्मा, आनंद, अमरदेव पांडेय मौजूद रहे।
विज्ञापन