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धन के अभाव में गांवों में विकास की थमी रफ्तार
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:01 AM IST
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सोनभद्र। राज्य वित्त व चौदहवां वित्त का धन ग्राम पंचायतों के खाते में नही आने से गांवों में विकास की रफ्तार थम गई हैं। कई माह तक धन न मिलने से ग्राम प्रधानों में नाराजगी है। हालांकि पखवारे भर पूर्व राज्य वित्त व चौदहवां वित्त की पहली किश्त खाते में भेजी गई है, लेकिन अभी विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। एक तरफ सरकार का कहना है कि खजाने का मुंह गांव के तरफ खोल दिया गया है, दूसरी तरफ गांव की विकास के लिए खाते में धन नहीं भेजा जा रहा है।
गांवों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की शुरूआत की गई है। शासन की ओर से प्रत्येक वर्ष गांवों मेें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की आबादी के अनुसार ग्राम पंचायतों के खाते में राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की धनराशि भेजता है। चौदहवां वित्त की धनराशि से गांव मेें सड़क, नाली, पेयजल, स्कूल की मरम्मत आदि का कार्य कराया जाता है। जबकि राज्य वृत्त से हैंडपंप की मरम्मत, स्कूलों में शौचालय का निर्माण, प्रधानों का मानदेय, स्टेशनी समेत अन्य कामों में धन खर्च किया जाता है। लेकिन वर्ष 2017-18 में नवंबर माह तक राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में नही पहुंचा। जिससे विकास कार्य पूरी तरह से ठप है। जबकि योगी सरकार का कहना है कि शहर की तरह गांवों में सड़क, बिजली, पानी समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रधान विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन से धन की मांग करें। राष्ट्रीय पंचायती प्रधान राज संगठन के जिला प्रधारी एवं मंडल महासचिव मोहन पांडेय ने कहा कि अधिकारियों के उदासीनता के चलते चालू वित्तिय वर्ष में करीब 15 दिन पूर्व चौदहवां वित्त की प्रथम किश्त पंचायतों के खाते में पहुंची है। उसके पूर्व राज्य वित्त की धनराशि खातों में पहुंची थी। कहा कि विलंब से किश्त मिलने के कारण अभी तक किसी ग्राम पंचायत में चौदहवां वित्त से काम शुरू नहीं हुआ है।
वर्जन...
राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की पहली किश्त ग्राम पंचायतों के खाते में चली गई है। जल्द ही दूसरी किश्त भी खाते में चली जाएगी। जिससे प्रधान जरूरत के अनुसार विकास कार्य करा सकें। - कृपाशंकर शुक्ला, एडीओ पंचायत चतरा।
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गांवों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की शुरूआत की गई है। शासन की ओर से प्रत्येक वर्ष गांवों मेें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की आबादी के अनुसार ग्राम पंचायतों के खाते में राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की धनराशि भेजता है। चौदहवां वित्त की धनराशि से गांव मेें सड़क, नाली, पेयजल, स्कूल की मरम्मत आदि का कार्य कराया जाता है। जबकि राज्य वृत्त से हैंडपंप की मरम्मत, स्कूलों में शौचालय का निर्माण, प्रधानों का मानदेय, स्टेशनी समेत अन्य कामों में धन खर्च किया जाता है। लेकिन वर्ष 2017-18 में नवंबर माह तक राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में नही पहुंचा। जिससे विकास कार्य पूरी तरह से ठप है। जबकि योगी सरकार का कहना है कि शहर की तरह गांवों में सड़क, बिजली, पानी समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रधान विकास कार्य कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन से धन की मांग करें। राष्ट्रीय पंचायती प्रधान राज संगठन के जिला प्रधारी एवं मंडल महासचिव मोहन पांडेय ने कहा कि अधिकारियों के उदासीनता के चलते चालू वित्तिय वर्ष में करीब 15 दिन पूर्व चौदहवां वित्त की प्रथम किश्त पंचायतों के खाते में पहुंची है। उसके पूर्व राज्य वित्त की धनराशि खातों में पहुंची थी। कहा कि विलंब से किश्त मिलने के कारण अभी तक किसी ग्राम पंचायत में चौदहवां वित्त से काम शुरू नहीं हुआ है।
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राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त की पहली किश्त ग्राम पंचायतों के खाते में चली गई है। जल्द ही दूसरी किश्त भी खाते में चली जाएगी। जिससे प्रधान जरूरत के अनुसार विकास कार्य करा सकें। - कृपाशंकर शुक्ला, एडीओ पंचायत चतरा।
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