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2500 करोड़ से ऊपर पहुंचा पांचों इकाइयों के आरएंडएम का खर्च

Sat, 09 Feb 2019 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 11:54 PM IST
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2500 करोड़ से ऊपर पहुंचा पांचों इकाइयों के आरएंडएम का खर्च
ओबरा। ओबरा तापीय परियोजना की 200 मेगावाट की पांचों इकाइयों की अनुरक्षण और आधुनिकीकरण के लिए पीएएफसी से लिए गए धन से निर्धारित समय मे कार्य पूर्ण नहीं हो सका। पहले निर्धारित अवधि मार्च 2012 और बाद में बढ़ाकर जून 2017 की गई बावजूद समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं हो सका। अब कार्य पूर्ण न होने से परियोजना पर 205 करोड़ का ब्याज का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। इस व्याज की भरपाई के लिए उत्पादन निगम ने प्रदेश सरकार से 205 करोड़ की और डिमांड किया है। उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी ने बताया कि यदि ब्याज नही भरा गया तो आगे कार्य के लिए धन नही मिल सकेगा। वहीं बीते 14 अक्टूबर को परियोजना में हुई अगलगी की घटना के बाद करीब 111 करोड़ इकाइयों के रिवाइवल के लिए अतिरिक्त खर्च होंगे। कार्य को समय से पूरा करने में कार्यदायी मेसर्स बीएचईएल पूरी तरह से विफल रही है। इसके कारण समय समय पर खर्च में भी इजाफा होता रहा है जिससे उत्पादन निगम को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। गौरतलब है कि 200 मेगावाट की पांचों इकाइयों के आरएंडएम के लिए 21 फरवरी 2007 को बीएचईएल के साथ 1635 करोड़ में अनुबंध किया गया था। जिसमें सभी पांचों इकाइयों के आर एंड एम का कार्य छह छह माह में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यही नही इन इकाइयों की क्षमता 200 मेगावाट से बढ़ाकर 216 मेगावाट किया जाना था। नौवीं ईकाई को अप्रैल 2009 से नवंबर 2009, दसवीं इकाई को दिसंबर 2009 से जून 2010, 11वीं ईकाई को जुलाई 2010 से जनवरी 2011, 12वीं ईकाई को फरवरी 2011 से अगस्त 2011 और 13वीं ईकाई को सितंबर 2011 से मार्च 2012 की समयावधि के बीच पूरा किया जाना था। लेकिन बीएचईएल की लेटलतीफी के नाते तत्कालीन 1635 करोड़ का खर्च 2500 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। पावर फाइनेंस कंपनी से लिये गए कर्ज के ब्याज में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है। वहीं बीते दिनों परियोजना में आग के कारण खर्च में और इजाफा हुआ है। इसके कारण उत्पादन निगम पर बोझ बढ़ता जा रहा है। नौवीं, दसवीं और ग्यारवीं इकाई मौजूदा समय मे उत्पादनरत हैं। मगर इकाइयों की क्षमता को 216 मेगावाट किये जाने में बीएचईएल पूरी तरह से विफल रही है।
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