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प्रदूषण से अनपरा गांव का हर दूसरा व्यक्ति बीमार
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:52 PM IST
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अनपरा गांव में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण से आजिज नागरिकों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर प्रदूषण पर रोक लगाये जाने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वह धरना प्रदर्शन के लिए विवश होंगे।
अनपरा गांव सुदर्शन सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान मोती चंद यादव, धनराज भारती आदि ने भेजे पत्र में कहा है कि अनपरा तापीय परियोजना के ए बी सी एवं डी से व्यापक पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है। इससे नागरिक विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्राचार के माध्यम से कई बार शासन-प्रशासन सहित परियोजना प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया गया परंतु कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कोरम पूर्ति की जा रही है। प्रदूषण का आलम यह है कि कोयले की उड़ती धूल एवं चिमनियों से निकलने वाले राख के कण नागरिकों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे असमय गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। शुद्ध हवा, पानी नसीब न होने से हर घर में कोई न कोई दमा, खासी, चर्म रोग, टीबी, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से ग्रसित हैं। दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से नागरिक सहित पेड्र पौधे भी प्रभावित हो रहे हैं। घर-घर में कोयले की कालिख देखी जा सकती है। गांव में स्थापित पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय का हाल तो और भी बुरा है जहां कोयले की धूल की परत जमी हुई है। दूषिण पर्यावरण मेें बच्चे पढने को विवश हैं। कहा कि पत्राचार करते करते ग्रामीण अब थक चुके यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।
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अनपरा गांव सुदर्शन सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान मोती चंद यादव, धनराज भारती आदि ने भेजे पत्र में कहा है कि अनपरा तापीय परियोजना के ए बी सी एवं डी से व्यापक पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है। इससे नागरिक विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्राचार के माध्यम से कई बार शासन-प्रशासन सहित परियोजना प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया गया परंतु कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कोरम पूर्ति की जा रही है। प्रदूषण का आलम यह है कि कोयले की उड़ती धूल एवं चिमनियों से निकलने वाले राख के कण नागरिकों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे असमय गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। शुद्ध हवा, पानी नसीब न होने से हर घर में कोई न कोई दमा, खासी, चर्म रोग, टीबी, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से ग्रसित हैं। दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से नागरिक सहित पेड्र पौधे भी प्रभावित हो रहे हैं। घर-घर में कोयले की कालिख देखी जा सकती है। गांव में स्थापित पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय का हाल तो और भी बुरा है जहां कोयले की धूल की परत जमी हुई है। दूषिण पर्यावरण मेें बच्चे पढने को विवश हैं। कहा कि पत्राचार करते करते ग्रामीण अब थक चुके यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।
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