{"_id":"5cd710b9bdec22071a3885ab","slug":"51557598393-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनावी वादों को पूरा करते थे सांसद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनावी वादों को पूरा करते थे सांसद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सोनभद्र। पहले नि:स्वार्थ ढंग से जनता की सेवा करने वाले ही चुनाव लड़ते थे। प्रत्याशी क्षेत्रीय समस्याओं को मुद्दा बनाकर जनता के बीचे में वोट मांगने के लिए जाते थे। सांसद बनने के बाद चुनावी वादों को पूरा करते थे। यह कहना बुजुर्ग मतदाताओं का है।
राबर्ट्सगंज के सिविल लाइंस रोड निवासी एडवोकेट मार्तंड मिश्रा कहते हैं कि पहले साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति चुनाव लड़ते थे और जीतने के बाद विकास कार्य कराते थे। सांसद जनता के बीच में जाकर उनकी समस्याएं सुनते थे और उससे निजात दिलाने के लिए भरकस प्रयास करते थे। जाति-पाति की राजनीति हावी नहीं थी। लेकिन अब चुनाव में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हर्षनगर निवासी झुनझुन शर्मा ने कहा कि राजनैतिक पार्टियां पहले स्थानीय नेताओं से वार्ता कर उन्हीं में से किसी एक को प्रत्याशी बनाते थे। सभी दलों के नेता अपने-अपने उम्मीदवारों को जीताने के लिए जीजान लगा देते थे। कोई भी व्यक्ति आसानी से सांसद से मिलकर अपनी समस्याएं बता लेता था। लेकिन अब ऐसा नहीं देखने को मिलता है। अब चुनाव जीतते ही सांसद सुरक्षा के घेरे में हो जाते है। उनके साथ पुलिसकर्मी हो जाते हैं। इस नाते हर व्यक्ति अपने सांसद से मिल तक नहीं पाता है।
राबर्ट्सगंज के सिविल लाइंस रोड निवासी एडवोकेट मार्तंड मिश्रा कहते हैं कि पहले साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति चुनाव लड़ते थे और जीतने के बाद विकास कार्य कराते थे। सांसद जनता के बीच में जाकर उनकी समस्याएं सुनते थे और उससे निजात दिलाने के लिए भरकस प्रयास करते थे। जाति-पाति की राजनीति हावी नहीं थी। लेकिन अब चुनाव में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हर्षनगर निवासी झुनझुन शर्मा ने कहा कि राजनैतिक पार्टियां पहले स्थानीय नेताओं से वार्ता कर उन्हीं में से किसी एक को प्रत्याशी बनाते थे। सभी दलों के नेता अपने-अपने उम्मीदवारों को जीताने के लिए जीजान लगा देते थे। कोई भी व्यक्ति आसानी से सांसद से मिलकर अपनी समस्याएं बता लेता था। लेकिन अब ऐसा नहीं देखने को मिलता है। अब चुनाव जीतते ही सांसद सुरक्षा के घेरे में हो जाते है। उनके साथ पुलिसकर्मी हो जाते हैं। इस नाते हर व्यक्ति अपने सांसद से मिल तक नहीं पाता है।
विज्ञापन