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वन भूमि को लेकर हुई बैठक हंगामे में तब्दील
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:08 PM IST
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अनपरा। म्योरपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत ककरी सभागार में एनसीएल बीना-ककरी एकीकरण के लिए 30.50 हेक्टेयर प्रस्तावित वन भूमि को लेकर आयोजित बैठक रविवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्थानीय लोगों ने वन व राजस्व विभाग के अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बैठक का ही बहिष्कार कर दिया।
ग्राम पंचायत ककरी के सभागार में बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद स्थानीय अंकुश दूबे, हरिनाथ खरवार की राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि नियमानुसार दावे ग्राम स्तरीय वन समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते है तथा ग्राम स्तरीय वन समिति प्राप्त दावों को उपखंड स्तरीय वन समिति को अग्रसारित करती है लेकिन बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों दबाव बनाया जा रहा था कि दावा उनके पास जमा किया जाए जो कि वनाधिकार अधिनियम के विरुद्ध है व ग्राम स्तरीय वन समिति ककरी का गठन नहीं हुआ है। ऐसे में बगैर ग्राम स्तरीय वन समिति के गठन के वनाधिकार के दावों की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की जा सकती है। कहना है कि एक तरफ दावे मांगे जा रहे है दूसरी तरफ प्रभागीय वनाधिकारी रेणुकूट द्वारा ग्राम स्तरीय वन समिति के समक्ष वैध दावा प्रस्तुत न होने से कोई दावा अग्रसारित नहीं किया गया है। इससे साफ जाहिर है कि राजस्व व वन विभाग आदिवासियों को अनावश्यक परेशान कर रहा है। इस बैठक का प्रधान प्रतिनिधि राम विशाले, सदस्य विवेक जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, सुखेंद्र यादव, ठाकुर प्रसाद खैरवार, सत्यनारायण खैरवार, लालबहादुर गोंड़, सुरज पनिका, रमेश पनिका आदि रहे।
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ग्राम पंचायत ककरी के सभागार में बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद स्थानीय अंकुश दूबे, हरिनाथ खरवार की राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि नियमानुसार दावे ग्राम स्तरीय वन समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते है तथा ग्राम स्तरीय वन समिति प्राप्त दावों को उपखंड स्तरीय वन समिति को अग्रसारित करती है लेकिन बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों दबाव बनाया जा रहा था कि दावा उनके पास जमा किया जाए जो कि वनाधिकार अधिनियम के विरुद्ध है व ग्राम स्तरीय वन समिति ककरी का गठन नहीं हुआ है। ऐसे में बगैर ग्राम स्तरीय वन समिति के गठन के वनाधिकार के दावों की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की जा सकती है। कहना है कि एक तरफ दावे मांगे जा रहे है दूसरी तरफ प्रभागीय वनाधिकारी रेणुकूट द्वारा ग्राम स्तरीय वन समिति के समक्ष वैध दावा प्रस्तुत न होने से कोई दावा अग्रसारित नहीं किया गया है। इससे साफ जाहिर है कि राजस्व व वन विभाग आदिवासियों को अनावश्यक परेशान कर रहा है। इस बैठक का प्रधान प्रतिनिधि राम विशाले, सदस्य विवेक जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, सुखेंद्र यादव, ठाकुर प्रसाद खैरवार, सत्यनारायण खैरवार, लालबहादुर गोंड़, सुरज पनिका, रमेश पनिका आदि रहे।
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