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464 शिक्षक कार्यमुक्त, खाली हो गए दर्जनों स्कूल
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लंबे समय से तबादले का इंतजार कर रहे 464 शिक्षकों को कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसमें ज्यादातर शिक्षक दूरदराज के ब्लाकों में तैनात थे। बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले के बाद दर्जनों विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं। इन स्कूलों में अब सिर्फ अनुदेशक और शिक्षा मित्र के भरोसे ही पढ़ाई होगी। इसके बावजूद विभाग सुचारु संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा कर रहा है।
जिले के 2061 विद्यालयों में नामांकित 2.70 लाख बच्चों के सापेक्ष यहां करीब 5300 शिक्षकों की तैनाती थी। आरटीई के छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन कराने के लिए यहां करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों की पहले से कमी थी। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालयों पर कहीं एक तो कहीं दो शिक्षकों के भरोसे कक्षाएं संचालित कराई जा रही थीं। अब कोर्ट के आदेश से 464 शिक्षकों का गैर जनपद तबादला हो गया है। पिछले कई दिनों से इसकी प्रक्रिया चल रही थी। बुधवार को इसे अंतिम रूप देते हुए इन शिक्षकों को कार्यमुक्त भी कर दिया गया। बड़ी संख्या में शिक्षकों के कार्यमुक्त होने के बाद शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शिक्षकों की कमी से जूझते ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं। अकेले म्योरपुर ब्लाक में ही दस विद्यालयों में अब कोई शिक्षक नहीं बचा है। कोने में ऐसे विद्यालयों की संख्या 11 है। कमोबेश यही हाल दुद्धी, बभनी, नगवां और चतरा ब्लाक का भी है। सबसे खराब स्थिति चोपन ब्लॉक की है। यहां 28 फीसदी स्कूलों में ही छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन हो पा रहा था। अब शिक्षकों के तबादले के बाद यह आंकड़ा और भी कम हो गया है। तमाम विद्यालय एकल अध्यापकीय हो गए हैं। लिहाजा यहां पठन-पाठन की व्यवस्था अब शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के कंधे पर है।
कोर्ट के आदेश पर 464 शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। इसके लिए प्रक्रिया कई दिनों से चल रही थी। शिक्षकों के जाने से रिक्त हुए विद्यालयों के सुचारु संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। बच्चों की पढ़ाई किसी भी रूप में बाधित नहीं होने दी जाएगी। -हरिवंश कुमार, बीएसए।
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जिले के 2061 विद्यालयों में नामांकित 2.70 लाख बच्चों के सापेक्ष यहां करीब 5300 शिक्षकों की तैनाती थी। आरटीई के छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन कराने के लिए यहां करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों की पहले से कमी थी। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालयों पर कहीं एक तो कहीं दो शिक्षकों के भरोसे कक्षाएं संचालित कराई जा रही थीं। अब कोर्ट के आदेश से 464 शिक्षकों का गैर जनपद तबादला हो गया है। पिछले कई दिनों से इसकी प्रक्रिया चल रही थी। बुधवार को इसे अंतिम रूप देते हुए इन शिक्षकों को कार्यमुक्त भी कर दिया गया। बड़ी संख्या में शिक्षकों के कार्यमुक्त होने के बाद शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शिक्षकों की कमी से जूझते ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं। अकेले म्योरपुर ब्लाक में ही दस विद्यालयों में अब कोई शिक्षक नहीं बचा है। कोने में ऐसे विद्यालयों की संख्या 11 है। कमोबेश यही हाल दुद्धी, बभनी, नगवां और चतरा ब्लाक का भी है। सबसे खराब स्थिति चोपन ब्लॉक की है। यहां 28 फीसदी स्कूलों में ही छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन हो पा रहा था। अब शिक्षकों के तबादले के बाद यह आंकड़ा और भी कम हो गया है। तमाम विद्यालय एकल अध्यापकीय हो गए हैं। लिहाजा यहां पठन-पाठन की व्यवस्था अब शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के कंधे पर है।
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कोर्ट के आदेश पर 464 शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया है। इसके लिए प्रक्रिया कई दिनों से चल रही थी। शिक्षकों के जाने से रिक्त हुए विद्यालयों के सुचारु संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। बच्चों की पढ़ाई किसी भी रूप में बाधित नहीं होने दी जाएगी। -हरिवंश कुमार, बीएसए।
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