{"_id":"6564f4276507c5a38804deea","slug":"23-seats-remained-vacant-for-mining-engineering-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-6301-2023-11-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: माइनिंग इंजीनियरिंग की खाली रह गई 23 सीटें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: माइनिंग इंजीनियरिंग की खाली रह गई 23 सीटें
विज्ञापन
राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरू हुए माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स में पहले सत्र में पर्याप्त विद्यार्थी नहीं मिले हैं। कुल 30 सीटों के सापेक्ष महज सात छात्र-छात्राओं ने ही दाखिला लिया है। खनन प्रधान जिले में कॅरियर की बेहतर संभावनाओं के बावजूद युवाओं की कम रुचि के लिए जागरुकता की कमी और पाठ्यक्रम की मंजूरी में देरी का कारण माना जा रहा है। आगामी सत्रों से इसमें वृद्धि की संभावना है।
यूपी-एमपी की सीमा पर कोयले की दस खदाने हैं। इनमें खनन पेशेवरों की मांग बराबर रहती है। इसके अलावा ओबरा-डाला में स्थित पत्थर की खदानों में भी खनन विशेषज्ञों का अभाव है। इस लिहाज से जिले में संचालित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में माइनिंग इंजीनिरिंग की पढ़ाई शुरू कराई गई है। इस कोर्स को लागू करने वाला यह पहला राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज भी है। अभी तक माइनिंग की पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों को आईआईटी जैसे संस्थानों में ही दाखिला लेना पड़ता था। एकेटीयू से संबद्ध राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में माइनिंग की पढ़ाई शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि इसमें दाखिले के लिए काफी संख्या रहेगी। खासतौर से सोनभद्र व आसपास के जिलों में युवा रुचि दिखाएंगे।
डीएमएफ से स्थापित की गई है आधुनिक लैब
जिले में खनन पेशेवर तैयार करने के लिए जिला प्रशासन ने भी पूरा सहयोग किया है। आधुनिक लैब बनाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि से धनराशि दी गई है। माइनिंग सर्वेयिंग, माइन जियोलॉजी, रॉक मैकेनिक्स की प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
विज्ञापन
खनन पेशेवरों की हर क्षेत्र में मांग
माइनिंग इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि माइनिंग इंजीनियरिंग में स्नातकों की विभिन्न सरकारी संगठनों में हमेशा मांग रहती है। पृथ्वी से कोयला, स्टील, लोहा आदि प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों के निष्कर्षण से संबंधित संस्थानों में खनन पेशेवर रखे जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर अब योजनाबद्ध तरीके से खनन की जरूरत है। ऐसे में आगामी वर्षों में खनन इंजीनियर की मांग में वृद्धि होने की पूरी संभावना है। बहुत से युवाओं को अभी इस कोर्स के बारे में जानकारी नहीं थी। इस कारण पहले सत्र में सीटें सीमित रखी गई थीं। आगे इसमें वृद्धि होगी।
विज्ञापन
यूपी-एमपी की सीमा पर कोयले की दस खदाने हैं। इनमें खनन पेशेवरों की मांग बराबर रहती है। इसके अलावा ओबरा-डाला में स्थित पत्थर की खदानों में भी खनन विशेषज्ञों का अभाव है। इस लिहाज से जिले में संचालित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में माइनिंग इंजीनिरिंग की पढ़ाई शुरू कराई गई है। इस कोर्स को लागू करने वाला यह पहला राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज भी है। अभी तक माइनिंग की पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों को आईआईटी जैसे संस्थानों में ही दाखिला लेना पड़ता था। एकेटीयू से संबद्ध राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में माइनिंग की पढ़ाई शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि इसमें दाखिले के लिए काफी संख्या रहेगी। खासतौर से सोनभद्र व आसपास के जिलों में युवा रुचि दिखाएंगे।
विज्ञापन
डीएमएफ से स्थापित की गई है आधुनिक लैब
जिले में खनन पेशेवर तैयार करने के लिए जिला प्रशासन ने भी पूरा सहयोग किया है। आधुनिक लैब बनाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि से धनराशि दी गई है। माइनिंग सर्वेयिंग, माइन जियोलॉजी, रॉक मैकेनिक्स की प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
विज्ञापन
खनन पेशेवरों की हर क्षेत्र में मांग
माइनिंग इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि माइनिंग इंजीनियरिंग में स्नातकों की विभिन्न सरकारी संगठनों में हमेशा मांग रहती है। पृथ्वी से कोयला, स्टील, लोहा आदि प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों के निष्कर्षण से संबंधित संस्थानों में खनन पेशेवर रखे जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर अब योजनाबद्ध तरीके से खनन की जरूरत है। ऐसे में आगामी वर्षों में खनन इंजीनियर की मांग में वृद्धि होने की पूरी संभावना है। बहुत से युवाओं को अभी इस कोर्स के बारे में जानकारी नहीं थी। इस कारण पहले सत्र में सीटें सीमित रखी गई थीं। आगे इसमें वृद्धि होगी।