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बिना नोटिस के ही कार्य से किया अवमुक्त
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:04 AM IST
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अनपरा तापीय परियोजना कर्मचारी उपभोक्ता सहकारी समिति के दो सहायकों ने जिलाधिकारी एवं उपश्रमायुक्त को पत्र प्रेषित कर समिति के अध्यक्ष एवं सचिव पर उत्पीडन का आरोप लगाते हुए कार्य पर वापस लिये जाने व न्यूनतम मजदूरी दिलाने की मांग की है।
चन्द्रमा प्रसाद व व्यास कुमार सिंह ने भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि कर्मचारी उपभोक्ता सहकारी समिति में वह वर्ष 1986 से सहायक पद पर कार्यरत है। समिति इण्डेन गैस वितरण एवं आटा चक्की का संचालन करती है । उन्होंने कहा कि 32 वर्षों से वह अपने दायित्वों का निर्वहन करते आ रहे है लेकिन उन्हें कभी भी न्यूनतम मजदूरी प्रदान नहीं की गयी। 16 मार्च को श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा जब इण्डेन गैस एजेंसी का निरीक्षण किया गया तथा उनसे संबंधित कर्मचारियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के लिए कहां गया तो अध्यक्ष व सचिव उनके ऊपर दबाव बनाने लगे कि न्यूनतम मजदूरी के रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर दो। उन्होंने इससे साफ मना कर दिया, जिससे उन्होंने फरवरी माह का वेतन न देते हुए बिना नोटिस दिये ही कार्य से निकाल दिया।
इस संबंध में श्रम प्रवर्तन अधिकारी संदीप कुमार सिंह ने निरीक्षण की बात स्वीकारते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को बिना कारण बताये कार्य से अवमुक्त नहीं किया जा सकता है। मामले को संज्ञान में लेकर जांच की जायेगी।
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चन्द्रमा प्रसाद व व्यास कुमार सिंह ने भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि कर्मचारी उपभोक्ता सहकारी समिति में वह वर्ष 1986 से सहायक पद पर कार्यरत है। समिति इण्डेन गैस वितरण एवं आटा चक्की का संचालन करती है । उन्होंने कहा कि 32 वर्षों से वह अपने दायित्वों का निर्वहन करते आ रहे है लेकिन उन्हें कभी भी न्यूनतम मजदूरी प्रदान नहीं की गयी। 16 मार्च को श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा जब इण्डेन गैस एजेंसी का निरीक्षण किया गया तथा उनसे संबंधित कर्मचारियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने के लिए कहां गया तो अध्यक्ष व सचिव उनके ऊपर दबाव बनाने लगे कि न्यूनतम मजदूरी के रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर दो। उन्होंने इससे साफ मना कर दिया, जिससे उन्होंने फरवरी माह का वेतन न देते हुए बिना नोटिस दिये ही कार्य से निकाल दिया।
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इस संबंध में श्रम प्रवर्तन अधिकारी संदीप कुमार सिंह ने निरीक्षण की बात स्वीकारते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को बिना कारण बताये कार्य से अवमुक्त नहीं किया जा सकता है। मामले को संज्ञान में लेकर जांच की जायेगी।
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