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गुरू-शिष्य के रिश्ते की पवित्रता को बनाएं रखें
Updated Tue, 31 Jul 2018 11:44 PM IST
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खलियारी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से मंगलवार को सूअरसोत गांव के प्राथमिक विद्यालय में गुरु दक्षिणा कार्यक्रम हुआ। इसमें गुरु दक्षिणा में होने वाले गुप्त दान से कराये जाने वाले महत्व पूर्ण कार्यों के बारे में जानकारी दी गई। नगवां प्रचारक अभय ने गुरु दक्षिणा कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य वक्ता हिरेश ने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार व सदाशिव गोलवलकर ने की थी। तब उन्होंने भगवा ध्वज को गुरु मानकर संगठन को आगे बढ़ाया जो अब एक आदर्श रूप में राष्ट्रहित में काम कर रहा है। सत्यम ने कार्यक्रम का संचालन किया। आरएसएस गुरु पूजन का कार्यक्रम सुबह छह बजे से सूअरसोत, 11 बजे से दुल्लहपुर शाखा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को हिरेश, हरिराम ने संबोधित किया। उन्होंने सभी स्वयं सेवकों को गुरु शिष्य के रिश्तों की पवित्रता को समझाया। बताया कि गुरु तो कोई भी हो सकता है, लेकिन हम स्वयं सेवक भगवा ध्वज को ही गुरु क्यों मानें, क्योंकि यही हमारे सनातन धर्म की पहचान है। सूर्य जब पूरे विश्व को रोशनी देने आता है तो उसकी लालिमा इसी रंग की होती है। इसलिए हमारे पूर्वजों ने इसी रंग को अपना ध्वज अपनाया और आरएसएस ने इसी ध्वज को अपना गुरु माना। कार्यक्रम में संतोष, चंद्रशेखर, बालेश्वर, सत्यम, नीलेश, शैलेश, आलोक, निशांत, रवि समेत कई स्वयं सेवक मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता हिरेश ने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार व सदाशिव गोलवलकर ने की थी। तब उन्होंने भगवा ध्वज को गुरु मानकर संगठन को आगे बढ़ाया जो अब एक आदर्श रूप में राष्ट्रहित में काम कर रहा है। सत्यम ने कार्यक्रम का संचालन किया। आरएसएस गुरु पूजन का कार्यक्रम सुबह छह बजे से सूअरसोत, 11 बजे से दुल्लहपुर शाखा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को हिरेश, हरिराम ने संबोधित किया। उन्होंने सभी स्वयं सेवकों को गुरु शिष्य के रिश्तों की पवित्रता को समझाया। बताया कि गुरु तो कोई भी हो सकता है, लेकिन हम स्वयं सेवक भगवा ध्वज को ही गुरु क्यों मानें, क्योंकि यही हमारे सनातन धर्म की पहचान है। सूर्य जब पूरे विश्व को रोशनी देने आता है तो उसकी लालिमा इसी रंग की होती है। इसलिए हमारे पूर्वजों ने इसी रंग को अपना ध्वज अपनाया और आरएसएस ने इसी ध्वज को अपना गुरु माना। कार्यक्रम में संतोष, चंद्रशेखर, बालेश्वर, सत्यम, नीलेश, शैलेश, आलोक, निशांत, रवि समेत कई स्वयं सेवक मौजूद रहे।
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