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प्रदूषण को लेकर अधिकांश सामाजिक संस्थाएं हैं उदासीन
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:35 AM IST
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सोनभद्र। दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित स्थानों में गिने जाने वाले जिले में 16 सौ से अधिक संस्थाएं/सामाजिक संगठन क्रियाशील हैं। बावजूद प्रदूषण पर रोकथाम को लेकर अधिकांश सामाजिक संस्थाएं उदासीन बनी हुई हैं। 1954 में स्थापित बनवासी सेवा आश्रम जहां 1996 से इसको लेकर लगातार आवाज उठाए हुए है। वहीं फ्लोरोसिस से प्रभावित गांवों को शासन स्तर पर पहचान दिलाने में आश्रम की अहम भूमिका रही है। अब तक सरकारी, गैर सरकारी जो सर्वे हुए हैं, उसमें भी इस आश्रम ने अहम भूमिका निभाई है।
वहीं 2016 में गठित सिंगरौली मुक्ति वाहिनी भी प्रदूषण को लेकर लगातार आवाज उठाए हुए हैं। इस संगठन ने रविवार को म्योरपुर में हुई सभा में जंगल बचाने के लिए वन सेना के गठन का भी ऐलान किया। औड़ी की सहयोग एनजीओ की तरफ से प्रदूषण को लेकर आवाज उठती रहती है। चुर्क की अंश संस्था की तरफ से भी विशेष अवसरों पर इसको लेकर सक्रियता दिखाई जाती है। ओबरा की रेणुका बचाओ संघर्ष समिति भी कई बार जागरूकता अभियान चला चुकी है लेकिन अभी भी सामाजिक तौर पर इसको लेकर काफी जागरूकता की जरूरत है।
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वहीं 2016 में गठित सिंगरौली मुक्ति वाहिनी भी प्रदूषण को लेकर लगातार आवाज उठाए हुए हैं। इस संगठन ने रविवार को म्योरपुर में हुई सभा में जंगल बचाने के लिए वन सेना के गठन का भी ऐलान किया। औड़ी की सहयोग एनजीओ की तरफ से प्रदूषण को लेकर आवाज उठती रहती है। चुर्क की अंश संस्था की तरफ से भी विशेष अवसरों पर इसको लेकर सक्रियता दिखाई जाती है। ओबरा की रेणुका बचाओ संघर्ष समिति भी कई बार जागरूकता अभियान चला चुकी है लेकिन अभी भी सामाजिक तौर पर इसको लेकर काफी जागरूकता की जरूरत है।
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