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Sonebhadra News: जिले की सड़कों पर 19 ब्लैक स्पॉट, 15 अकेले वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर
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जिले की सड़कों पर अब 19 ब्लैक स्पॉट हैं। पिछले साल इनकी संख्या 20 थी। ब्लैक स्पॉट की सूची में 17 नाम वही हैं, जो पूर्व के वर्षों में भी सर्वाधिक हादसों के लिए चर्चित रहे हैं।
वहां दुर्घटनाएं कम करने के लिए हो रही लगातार माथापच्ची और सुधार कार्यक्रमों के बाद भी साल दर साल सूची में उनका नाम जस का तस है। सबसे ज्यादा 15 ब्लैक स्पॉट वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर है, जबकि जिले की अन्य सड़कों पर चार खतरनाक स्थान हैं।
सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर सरकार गंभीर है। हादसों को राेकने के लिए सड़कों की बनावट, उन पर सुरक्षा उपायों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।खास तौर से उन स्थानों को चिह्नित कर काम करने के निर्देश हैं, जहां अक्सर हादसे होते हैं।
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जिले में ऐसे 20 स्थानों को पिछले वर्ष चिह्नित कर ब्लैक स्पॉट का नाम दिया गया था। चिह्नित स्थानों पर हादसों में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेष उपाय करने की कवायद पूरे साल चलती रही।
इन कोशिशों के बाद भी 20 में से सिर्फ तीन स्थान ही ब्लैक स्पॉट की सूची से बाहर निकल पाए हैं। दो नया नाम भी जुड़ा है। ब्लैक स्पॉट की सूची में 15 स्थान वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर हैं। इसके अलावा घोरावल-रॉर्ट्सगंज मार्ग पर जैत, मुर्धवा से बभनी मार्ग पर किरबिल, नधिरा और चोपन-जुगैल मार्ग पर सिंदूरिया ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं।
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एक साल में पांच या अधिक मौतें होने पर घोषित होता है ब्लैक स्पॉट
सड़क पर किसी खास स्थान पर एक कैलेंडर वर्ष में पांच या उससे अधिक मौतें होती हैं तो उसे ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है। इसके बाद संबंधित कार्यदाई संस्था को वहां हादसों के कारण का अध्ययन कर सुधार कार्य कराने होते हैं। इसमें संकेतकों के अलावा ब्रेकर निर्माण, ब्लिंकर, कैट आई आदि कार्य शामिल हैं। यह भी देखा जाता है कि अगर किसी मोड़, ढलान, पहले से बने ब्रेकर या अन्य किसी तकनीकी कारण से हादसे हो रहे हैं तो उसे भी दूर कराना होता है। जिले के 19 में ज्यादातर ब्लैक स्पॉट साल दर साल सूची में शामिल हो रहे हैं। वहां सुधार के नाम पर खूब कार्यों का दावा होता है, मगर हादसों की लगातार बनी संख्या सच्चाई बयां कर रही है।
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ये हैं जिले के ब्लैक स्पॉट, यहां संभलकर चलें
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर उरमौरा, चंडी तिराहा, हिंदुआरी, लोहरा, मधुपुर, मारकुंडी, सलखन, पटवध, चोपन बैरियर, सिंदूरिया, चोपन कस्बा, डाला के ब्लैक स्पॉट उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथारिटी से नामित संस्था एसीपी टोलवेज के अंतर्गत है। इसी मार्ग पर हथवानी, रेणुकूट, औड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 और चिल्काडांड पीडब्ल्यूडी की निगरानी में है। पहले इस सूची में बिच्छी, गुरमुरा और खाड़पाथर भी शामिल थे। इसकी जगह अब लोहरा को जाेड़ा गया है। इसके अलावा रॉबर्ट्सगंज से घोरावल के बीच जैत नया ब्लैक स्पॉट बना है। नधिरा, किरबिल, सिंदूरिया भी पहले से ब्लैक स्पॉट की सूची में हैं।
सुधार के नाम पर कोरमपूर्ति से नहीं सुधरे हालात
ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्यों के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा हो रहा है। न ब्रेकर की स्थिति सुधारी जा रही है और न ही वहां पर्याप्त संकेतक लगाए जा रहे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति ने हादसों के अध्ययन के बाद चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप ब्रेकर बनाने की सलाह दी है, जिससे वाहनों को गति नियंत्रित करने में परेशानी न हो। इस पर कोई काम नहीं हुआ है। सड़क पर कहीं भी ब्रेकर पर सफेद पट्टी नहीं है। जगह-जगह खुले अवैध कट बंद नहीं किए गए हैं। कुछ स्थानों पर दुर्घटना बहुल क्षेत्र का बोर्ड लगाकर ही जिम्मेदारी पूरी कर ली गई है।
इस वर्ष कुल 19 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। तीन पुराने स्थान हटे और दो नए नाम जुड़े हैं। पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत चार ब्लैक स्पॉट हैं, जिस पर सुरक्षा से संबंधित काम शुरू करा दिया गया है। अन्य संस्थाओं को उनके अंतर्गत वाली सड़कों पर सुरक्षा संबंधित उपायों को बेहतर बनाने के निर्देश के साथ पत्र प्रेषित किया गया है।
-इं. शैलेश सिंह ठाकुर, पीडब्ल्यूडी व सचिव जिला सड़क सुरक्षा समिति।
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वहां दुर्घटनाएं कम करने के लिए हो रही लगातार माथापच्ची और सुधार कार्यक्रमों के बाद भी साल दर साल सूची में उनका नाम जस का तस है। सबसे ज्यादा 15 ब्लैक स्पॉट वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर है, जबकि जिले की अन्य सड़कों पर चार खतरनाक स्थान हैं।
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सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर सरकार गंभीर है। हादसों को राेकने के लिए सड़कों की बनावट, उन पर सुरक्षा उपायों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।खास तौर से उन स्थानों को चिह्नित कर काम करने के निर्देश हैं, जहां अक्सर हादसे होते हैं।
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जिले में ऐसे 20 स्थानों को पिछले वर्ष चिह्नित कर ब्लैक स्पॉट का नाम दिया गया था। चिह्नित स्थानों पर हादसों में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेष उपाय करने की कवायद पूरे साल चलती रही।
इन कोशिशों के बाद भी 20 में से सिर्फ तीन स्थान ही ब्लैक स्पॉट की सूची से बाहर निकल पाए हैं। दो नया नाम भी जुड़ा है। ब्लैक स्पॉट की सूची में 15 स्थान वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर हैं। इसके अलावा घोरावल-रॉर्ट्सगंज मार्ग पर जैत, मुर्धवा से बभनी मार्ग पर किरबिल, नधिरा और चोपन-जुगैल मार्ग पर सिंदूरिया ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं।
एक साल में पांच या अधिक मौतें होने पर घोषित होता है ब्लैक स्पॉट
सड़क पर किसी खास स्थान पर एक कैलेंडर वर्ष में पांच या उससे अधिक मौतें होती हैं तो उसे ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है। इसके बाद संबंधित कार्यदाई संस्था को वहां हादसों के कारण का अध्ययन कर सुधार कार्य कराने होते हैं। इसमें संकेतकों के अलावा ब्रेकर निर्माण, ब्लिंकर, कैट आई आदि कार्य शामिल हैं। यह भी देखा जाता है कि अगर किसी मोड़, ढलान, पहले से बने ब्रेकर या अन्य किसी तकनीकी कारण से हादसे हो रहे हैं तो उसे भी दूर कराना होता है। जिले के 19 में ज्यादातर ब्लैक स्पॉट साल दर साल सूची में शामिल हो रहे हैं। वहां सुधार के नाम पर खूब कार्यों का दावा होता है, मगर हादसों की लगातार बनी संख्या सच्चाई बयां कर रही है।
ये हैं जिले के ब्लैक स्पॉट, यहां संभलकर चलें
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर उरमौरा, चंडी तिराहा, हिंदुआरी, लोहरा, मधुपुर, मारकुंडी, सलखन, पटवध, चोपन बैरियर, सिंदूरिया, चोपन कस्बा, डाला के ब्लैक स्पॉट उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथारिटी से नामित संस्था एसीपी टोलवेज के अंतर्गत है। इसी मार्ग पर हथवानी, रेणुकूट, औड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-39 और चिल्काडांड पीडब्ल्यूडी की निगरानी में है। पहले इस सूची में बिच्छी, गुरमुरा और खाड़पाथर भी शामिल थे। इसकी जगह अब लोहरा को जाेड़ा गया है। इसके अलावा रॉबर्ट्सगंज से घोरावल के बीच जैत नया ब्लैक स्पॉट बना है। नधिरा, किरबिल, सिंदूरिया भी पहले से ब्लैक स्पॉट की सूची में हैं।
सुधार के नाम पर कोरमपूर्ति से नहीं सुधरे हालात
ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्यों के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा हो रहा है। न ब्रेकर की स्थिति सुधारी जा रही है और न ही वहां पर्याप्त संकेतक लगाए जा रहे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति ने हादसों के अध्ययन के बाद चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप ब्रेकर बनाने की सलाह दी है, जिससे वाहनों को गति नियंत्रित करने में परेशानी न हो। इस पर कोई काम नहीं हुआ है। सड़क पर कहीं भी ब्रेकर पर सफेद पट्टी नहीं है। जगह-जगह खुले अवैध कट बंद नहीं किए गए हैं। कुछ स्थानों पर दुर्घटना बहुल क्षेत्र का बोर्ड लगाकर ही जिम्मेदारी पूरी कर ली गई है।
इस वर्ष कुल 19 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। तीन पुराने स्थान हटे और दो नए नाम जुड़े हैं। पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत चार ब्लैक स्पॉट हैं, जिस पर सुरक्षा से संबंधित काम शुरू करा दिया गया है। अन्य संस्थाओं को उनके अंतर्गत वाली सड़कों पर सुरक्षा संबंधित उपायों को बेहतर बनाने के निर्देश के साथ पत्र प्रेषित किया गया है।
-इं. शैलेश सिंह ठाकुर, पीडब्ल्यूडी व सचिव जिला सड़क सुरक्षा समिति।