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आवागमन के साधन होते तो नहीं जाती जान
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सोनभद्र। जिले में अभी भी तमाम ऐसे क्षेत्र है जहां आवागमन के लिए संपर्क मार्ग से लेकर कोई संसाधन मुहैया नहीं है। इस नाते पहाड़ी क्षेत्र के तमाम लोग अब भी नदी, नालों के किनारों से होकर अपनी मंजिल तक जाते हैं। इससे जिले में अब तक तो कोई घटना सामने नहीं आई थी। लेकिन पहली बार पहाड़ी नाले के बहाव से तीन लोगों की मौत ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। माना जा रहा है कि प्रशासन ने आवागमन के संसाधान मुहैया कराए होते तो शायद इस तरह की घटना न होती।
बताते चले कि प्रत्येक वर्ष अरबों रुपये छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार सीमा को स्पर्श करने वाले नक्सल प्रभावित सोनभद्र में विकास कार्य कराने के नाम पर खर्च किया जाता है। इसके बावजूद नक्सल प्रभावित चननी, पोखरिया, मड़पा समेत अन्य इलाकों में अभी तक आवागमन के लिए संपर्क मार्ग से लेकर कोई अन्य संसाधन मुहैया नहीं कराया जा सका है। रात मेें इस क्षेत्र में 108, 102 एंबुलेंस भी मरीजों को लेने के लिए नहीं जाती है। इस इलाके में अभी विकास कार्यों की काफी दरकार है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को पोखरिया चौकी क्षेत्र गऊघाट के पास पहाड़ी पानी के बहाव से जंगली रास्ते से पैदल जा रहे दो मासूम बच्चें क्रमश: नंदनी, अमित और कौशिल्या की हुई मौत ने व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते घंटों विवश होकर बड़ैला गांव निवासी जवाहिर भुईया और उसकी पत्नी विवश अपनी बेटी और नातिन, नाती का शव देख मदद की गुहार लगाते रहे। उधर बड़ैला गांव में तीन लोगों की मौत की खबर पहुंची तो मातम पसर गया। घटनास्थल पर पहुंचे ओबरा सीओ डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने दंपती से घटना के बारे मेें जानकारी लेने के बाद उनकी हरसंभव मदद करने का भरोसा दिलाया। समाचार लिखे जाने तक शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था।
बताते चले कि प्रत्येक वर्ष अरबों रुपये छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार सीमा को स्पर्श करने वाले नक्सल प्रभावित सोनभद्र में विकास कार्य कराने के नाम पर खर्च किया जाता है। इसके बावजूद नक्सल प्रभावित चननी, पोखरिया, मड़पा समेत अन्य इलाकों में अभी तक आवागमन के लिए संपर्क मार्ग से लेकर कोई अन्य संसाधन मुहैया नहीं कराया जा सका है। रात मेें इस क्षेत्र में 108, 102 एंबुलेंस भी मरीजों को लेने के लिए नहीं जाती है। इस इलाके में अभी विकास कार्यों की काफी दरकार है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को पोखरिया चौकी क्षेत्र गऊघाट के पास पहाड़ी पानी के बहाव से जंगली रास्ते से पैदल जा रहे दो मासूम बच्चें क्रमश: नंदनी, अमित और कौशिल्या की हुई मौत ने व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते घंटों विवश होकर बड़ैला गांव निवासी जवाहिर भुईया और उसकी पत्नी विवश अपनी बेटी और नातिन, नाती का शव देख मदद की गुहार लगाते रहे। उधर बड़ैला गांव में तीन लोगों की मौत की खबर पहुंची तो मातम पसर गया। घटनास्थल पर पहुंचे ओबरा सीओ डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने दंपती से घटना के बारे मेें जानकारी लेने के बाद उनकी हरसंभव मदद करने का भरोसा दिलाया। समाचार लिखे जाने तक शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था।
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