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चोपन-सिंगरौली रेलमार्ग पर क्रासिंग न होने से परेशानी
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ओबरा। रेणुकापार क्षेत्र में चोपन-सिगरौली रेलमार्ग के बड़े हिस्से में एक भी क्रासिंग नहीं होने से आज भी लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था का ही सहारा लेना पड़ता है। जिससे हमेशा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। 20 किमी के हिस्से में एक भी अंडरपास या क्रासिग नहीं होने से क्षेत्र में आज भी बड़े वाहनों का आवागमन नहीं हो पाता है। दोपहिया वाहनों को भी रेल लाइन को पार करने के लिए जान जोखिम में डालना पड़ता है।
बुधवार को मिर्चाधुरी रेलवे स्टेशन के आगे रेलवे क्रासिंग नहीं होने से वैकल्पिक क्रासिंग से पार हो रही बोलेरो लिंक एक्सप्रेस की चपेट में आ गई, जिसमें ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। कई बड़े नालों पर बने ओवरब्रिज के नीचे से ही सूखे मौसम के दौरान वाहन जा पाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान ये वैकल्पिक मार्ग खतरनाक हो जाते हैं। गत कुछ वर्षों के दौरान दो बार रेल रोको आंदोलन किया गया। लेकिन रेलवे और प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अभी तक एक भी जगह पर रेलवे क्रासिंग नहीं बनाई गई।
वर्तमान में इस मार्ग पर दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य जारी है। इससे रेलवे ट्रैक की चौड़ाई काफी ज्यादा हो जाएगी। दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण में जहां एक ओर रेलवे द्वारा बड़ा बजट खर्च किया जा रहा है वहीं रेणुकापर के हजारों ग्रामीणों के आवागमन के लिए एक भी रेलवे क्रासिग और अंडरपास के बारे में कोई योजना नहीं बनाई गई है। मानसून सत्र के दौरान रेणुकापार के बड़े क्षेत्र में वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
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इस दौरान फफराकुंड, करमसार, कर्री, जुर्रा, खाडर, खैराही, चोरपनिया, धनबहवा, अमरसोता, बकिया, भोरार, पल्सो एवं कड़िया पश्चिम, बैरपुर ग्राम पंचायत के कई टोलों तक बड़े वाहन नहीं पंहुच पाते हैं। रेलमार्ग को क्रास करने वाले मार्ग पर प्रतिरोधक खंभे लगाने से समस्या और ज्यादा बढ़ गई है। दो तीन वर्षों में ही एंबुलेंस के न पहुंचने से दर्जनों ग्रामीणों की मौत हो चुकी है।
वर्तमान में चल रही दोहरीकरण की योजना के बीच जोगिद्रा गांव के पास एक अंडरपास बनाया जा रहा है। वर्ष 2005 में चोपन-गढ़वा रेलमार्ग पर सलईबनवा स्टेशन के पास निगा गांव में रेल पुल से नाला क्रास हो रहे एक दर्जन ग्रामीण ट्रेन की चपेट में आ गए। इसमें तीन ग्रामीणों की मौत हो गई थी साथ ही नौ ग्रामीण घायल हो गए थे। वर्ष 2006 में कड़िया के पास ग्रामीणों द्वारा बनाए गए क्रासिग पर ट्रेन की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गयी थी। इसके अलावा अन्य घटनाओं में दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।
बुधवार को मिर्चाधुरी रेलवे स्टेशन के आगे रेलवे क्रासिंग नहीं होने से वैकल्पिक क्रासिंग से पार हो रही बोलेरो लिंक एक्सप्रेस की चपेट में आ गई, जिसमें ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। कई बड़े नालों पर बने ओवरब्रिज के नीचे से ही सूखे मौसम के दौरान वाहन जा पाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान ये वैकल्पिक मार्ग खतरनाक हो जाते हैं। गत कुछ वर्षों के दौरान दो बार रेल रोको आंदोलन किया गया। लेकिन रेलवे और प्रशासन के आश्वासन के बावजूद अभी तक एक भी जगह पर रेलवे क्रासिंग नहीं बनाई गई।
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वर्तमान में इस मार्ग पर दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य जारी है। इससे रेलवे ट्रैक की चौड़ाई काफी ज्यादा हो जाएगी। दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण में जहां एक ओर रेलवे द्वारा बड़ा बजट खर्च किया जा रहा है वहीं रेणुकापर के हजारों ग्रामीणों के आवागमन के लिए एक भी रेलवे क्रासिग और अंडरपास के बारे में कोई योजना नहीं बनाई गई है। मानसून सत्र के दौरान रेणुकापार के बड़े क्षेत्र में वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
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इस दौरान फफराकुंड, करमसार, कर्री, जुर्रा, खाडर, खैराही, चोरपनिया, धनबहवा, अमरसोता, बकिया, भोरार, पल्सो एवं कड़िया पश्चिम, बैरपुर ग्राम पंचायत के कई टोलों तक बड़े वाहन नहीं पंहुच पाते हैं। रेलमार्ग को क्रास करने वाले मार्ग पर प्रतिरोधक खंभे लगाने से समस्या और ज्यादा बढ़ गई है। दो तीन वर्षों में ही एंबुलेंस के न पहुंचने से दर्जनों ग्रामीणों की मौत हो चुकी है।
वर्तमान में चल रही दोहरीकरण की योजना के बीच जोगिद्रा गांव के पास एक अंडरपास बनाया जा रहा है। वर्ष 2005 में चोपन-गढ़वा रेलमार्ग पर सलईबनवा स्टेशन के पास निगा गांव में रेल पुल से नाला क्रास हो रहे एक दर्जन ग्रामीण ट्रेन की चपेट में आ गए। इसमें तीन ग्रामीणों की मौत हो गई थी साथ ही नौ ग्रामीण घायल हो गए थे। वर्ष 2006 में कड़िया के पास ग्रामीणों द्वारा बनाए गए क्रासिग पर ट्रेन की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गयी थी। इसके अलावा अन्य घटनाओं में दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।