शक्तिनगर। साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में शनिवार को महाप्राण निराला जयंती की पूर्वं संध्या पर ज्वालामुखी कॉलोनी परिसर मे एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यंक्रम में मुख्य अतिथि कोटा राजस्थान के शायर कुँवर जावेद उपस्थित थे। अध्यक्षता माहिर मिजापज्ुरी ने की। संचालन योगेन्द्र मिश्र ने किया। कुँवर जावेद की राष्ट्रप्रेम से सराबोर कविताओं ने काव्य संध्या को अभूतपूर्व ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। उन्होंने कहा कि तुम अगर कीमती हीरा हो तो रातों में मिलो, धूप में काँच के टुकड़े भी चमक जाते हैं जैसी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुम्बई से आयी अलका जैन ने सारी शिकस्तगी को रखा गाँठ बाँधकर होंठों को खींचतान के हम मुस्कुरा दिये। गजल से अन्तर्मन की कशमकश को रेखांकित किया। प्रयागराज से आये अखिलेश द्विवेदी ने आज गयी दधि बेचन को मग में मोसे कान्हा ने की बरजोरी सुनाकर कृष्णभक्ति की सरिता बहायी तो रायपुर, छत्तीसगढ़ से आयी अरुणा चौहान ने ख्वाबों में कोई और न आया तुम्हारे बाद, गजल पेश कर प्रेम की मधुरिमा को व्यक्त किया। रीवा से आये सत्येन्द्र सेंगर ने ष्दरख्तों की घनी छाया में भी नुकसान होता हैए घनी छाया में पौधा कुछ ही दिन मेहमान होता है। गजल प्रस्तुत कर जीवन में संघर्ष की महत्ता को आवाज दी। पाणि पंकज पाण्डेय ने आखिर कब यह देश बनेगा जनता के अरमानों काष् गीत सुनाकर अवसरवादी राजनीति पर कटाक्ष किया। माहिर मिर्जापुरी ने खुद में डूब जाने से बनती है गजल सुनाकर कवि की रचना प्रक्रिया को स्पष्ट किया। इसके अतिरिक्त योगेन्द्र मिश्र, श्याम देव गुप्त रामखेलावन मिश्र ने भी सशक्त काव्यपाठ किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत महाकवि निराला के चित्र पर पुष्पांजलि से की गई। संस्था के सचिव प्रो मानिक चन्द पाण्डेय ने निराला के जीवन एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। संस्था के संरक्षक एवं एनटीपीसी शक्तिनगर के प्रबन्धकए राजभाषा आदेश पाण्डेय के आभार प्रदशज्न के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर राजेन्द्र दुबे, डॉ छोटेलाल जायसवाल, दिवाकर पटेल, श्रवण कुमार, उमेश जायसवाल, छोटू विश्वकर्मा, उपेन्द्र, गौतमी मिश्र, समिधा मिश्र आदि मौजूद रहे।