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Sonebhadra News: ग्राम पंचायतों में बनाए जाएंगे 1258 भूजल रिचार्ज पीट
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सोनभद्र। गर्मी के दिनों में जिले का जलस्तर नीचे चले जाने से हैंडपंप, सबमर्सिबल एवं कुएं सूख जाते हैं। इससे पेयजल समस्या उत्पन्न होती है। समस्या के समाधान के लिए डीएम ने भूगर्भ जल के रिचार्ज की कार्य योजना बनाई है।
उन्होंने शुक्रवार को भूगर्भ जल रिचार्ज पीट बनाने के अभियान की शुरुआत की। जिले के सभी ग्राम पंचायतों में प्रथम पेज में 1258 रिचार्ज पीट बनाए जाएगा। ग्राम पंचायतों में जो बोर फेल हो गए हैं या खराब हो गए हैं, उसे डिप बोरवेल रिचार्ज पीट बनाया जाएगा जिससे बरसात का पानी बोरवेल के माध्यम से भूगर्भ जल में भेजा जा सके एवं भूगर्भ जल को रिचार्ज किया जा सके।
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां बरसात का पानी भूगर्भ जल को रिचार्ज नहीं कर पाता। पत्थर के नीचे के लेयर को रिचार्ज करने के लिए पानी को उसके नीचे भेजना पड़ेगा। जिले में छोटे-छोटे सोक पीट एवं तालाब बनाए गए हैं, जिससे प्रथम लेयर का पानी रिचार्ज हो जाता है, लेकिन गर्मी के दिनों में वह पानी भी कम हो जाता है। डीएम चंद्र विजय सिंह ने बताया कि पेयजल एवं सिंचाई के लिए भूगर्भ जल का प्रयोग करते हैं। इसलिए वह पानी रिचार्ज करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में खराब बोर पर दो मीटर लंबाई दो मीटर चौड़ाई एवं दो मीटर गहराई का गड्ढा खोदकर उसकी पक्की जोड़ाई कराया जाना और उसे छत व बरसात के पानी से रिचार्ज करना है।
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डीएम ने ग्राम पंचायत केकराही में मॉडल बोरवेल का निरीक्षण किया एवं डिप बोर वेल रिचार्ज पीट को अभियान चला कर सभी ग्राम पंचायतों में कराने का निर्देश दिया। बताया कि रिचार्ज पीट में 400 लीटर पानी प्रति मिनट जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। एक बरसात में 500000 लीटर पानी भेजा जा सकता है। भूगर्भ रिचार्ज करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान इस कार्य में आगे आए एवं अपने ग्राम पंचायतों में बोरवेल रिचार्ज का निर्माण कराएं। निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ विशाल सिंह, डीसी अनिल केशरी, एडीओ पंचायत करमा ब्रिजेश सिंह, सचिव और ग्राम प्रधान केकराही उपस्थित रहे।
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उन्होंने शुक्रवार को भूगर्भ जल रिचार्ज पीट बनाने के अभियान की शुरुआत की। जिले के सभी ग्राम पंचायतों में प्रथम पेज में 1258 रिचार्ज पीट बनाए जाएगा। ग्राम पंचायतों में जो बोर फेल हो गए हैं या खराब हो गए हैं, उसे डिप बोरवेल रिचार्ज पीट बनाया जाएगा जिससे बरसात का पानी बोरवेल के माध्यम से भूगर्भ जल में भेजा जा सके एवं भूगर्भ जल को रिचार्ज किया जा सके।
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पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां बरसात का पानी भूगर्भ जल को रिचार्ज नहीं कर पाता। पत्थर के नीचे के लेयर को रिचार्ज करने के लिए पानी को उसके नीचे भेजना पड़ेगा। जिले में छोटे-छोटे सोक पीट एवं तालाब बनाए गए हैं, जिससे प्रथम लेयर का पानी रिचार्ज हो जाता है, लेकिन गर्मी के दिनों में वह पानी भी कम हो जाता है। डीएम चंद्र विजय सिंह ने बताया कि पेयजल एवं सिंचाई के लिए भूगर्भ जल का प्रयोग करते हैं। इसलिए वह पानी रिचार्ज करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में खराब बोर पर दो मीटर लंबाई दो मीटर चौड़ाई एवं दो मीटर गहराई का गड्ढा खोदकर उसकी पक्की जोड़ाई कराया जाना और उसे छत व बरसात के पानी से रिचार्ज करना है।
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डीएम ने ग्राम पंचायत केकराही में मॉडल बोरवेल का निरीक्षण किया एवं डिप बोर वेल रिचार्ज पीट को अभियान चला कर सभी ग्राम पंचायतों में कराने का निर्देश दिया। बताया कि रिचार्ज पीट में 400 लीटर पानी प्रति मिनट जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। एक बरसात में 500000 लीटर पानी भेजा जा सकता है। भूगर्भ रिचार्ज करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान इस कार्य में आगे आए एवं अपने ग्राम पंचायतों में बोरवेल रिचार्ज का निर्माण कराएं। निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ विशाल सिंह, डीसी अनिल केशरी, एडीओ पंचायत करमा ब्रिजेश सिंह, सचिव और ग्राम प्रधान केकराही उपस्थित रहे।