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फ्लोरोसिस पीड़ित सरजू हार गया जिंदगी की जंग
Updated Mon, 07 May 2018 12:44 AM IST
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विंढमगंज(सोनभद्र)। प्रदूषण प्रभावित सोनभद्र में प्रदूषणजनित फ्लोरोसिस बीमारी अब जिंदगियां लीलने लगी है। चोपन ब्लाक के कचनरवा ग्राम पंचायत के रोहनियादामर में फ्लोरोसिस के चलते शनिवार की रात एक व्यक्ति की मौत हो गई। ग्रामीणों का दावा है कि यहां छह माह में यह नौवीं मौत है। इससे जहां गांव के लोगों में हड़कंप है। वहीं पास के बस्ती के लोग भी हालात को लेकर डरे हुए हैं।
सरजू उरांव (60) पिछले 18 साल से गांव में शुद्ध पेयजल के लिए जिले से लेकर लखनऊ-दिल्ली तक जाकर आवाज उठा रहा था। उसका कहना था कि गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुए, वह प्रभावी नहीं हुए। कई परियोजनाएं सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गईं। उसके तीन बेटे हैं, वह भी फ्लोरोसिस प्रभावित हैं। इसको देखते हुए वह लगातार शुद्ध पेयजल के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के यहां चक्कर काटने में लगा हुआ था। उसे कोई कामयाबी मिलती, इससे पहले शनिवार की रात उसकी सांसें थम गईं। ग्रामीणों के मुताबिक छह माह के भीतर सरजू के अलावा उमाशंकर धांगर (30), किसमतिया देवी (50) पत्नी रामचंदर, उमाशंकर घसिया और उसका छह वर्षीय पुत्र रंजन, नगीना (35), हरिओम (28), राजकुमार (40), विनोद (30) की मौत हो गई। इसमें उमाशंकर घसिया की मौत के बीस दिन के भीतर उसके छह वर्षीय बेटे की मौत हो गई। फ्लोरोसिस के कारण इस गांव के लोगों में कमर का असमय टेढ़ा होना, हड्डी कमजोर होना, दांत पीला होना और आंख की रोशनी कम होना आम बात है। जवाहिर उरांव, करीमन, जीतू, लाल बहादुर, पुष्पा धांगर, पूर्व प्रधान संजय, नरेश, बच्चा, रामनाथ, मुनि, पिंटू, दिनेश लाल, बिहारी, अमेरिका, साबिर धांगर आदि का कहना था कि रोहनियादामर बस्ती का हर दूसरा व्यक्ति विकलांगता का शिकार हो रहा है लेकिन जिम्मेदार ध्यान देने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रधान उदय यादव का कहना था कि वह भी अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन यहां के लोगों को पूरी तरह से शुद्ध पेयजल अभी तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। वहीं सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का कहना था कि वह उस गांव में हर माह कैंप लगवाते हैं। इस बीमारी में लक्षण के आधार पर इलाज किया है।
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सरजू उरांव (60) पिछले 18 साल से गांव में शुद्ध पेयजल के लिए जिले से लेकर लखनऊ-दिल्ली तक जाकर आवाज उठा रहा था। उसका कहना था कि गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अब तक जो भी प्रयास हुए, वह प्रभावी नहीं हुए। कई परियोजनाएं सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गईं। उसके तीन बेटे हैं, वह भी फ्लोरोसिस प्रभावित हैं। इसको देखते हुए वह लगातार शुद्ध पेयजल के लिए अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के यहां चक्कर काटने में लगा हुआ था। उसे कोई कामयाबी मिलती, इससे पहले शनिवार की रात उसकी सांसें थम गईं। ग्रामीणों के मुताबिक छह माह के भीतर सरजू के अलावा उमाशंकर धांगर (30), किसमतिया देवी (50) पत्नी रामचंदर, उमाशंकर घसिया और उसका छह वर्षीय पुत्र रंजन, नगीना (35), हरिओम (28), राजकुमार (40), विनोद (30) की मौत हो गई। इसमें उमाशंकर घसिया की मौत के बीस दिन के भीतर उसके छह वर्षीय बेटे की मौत हो गई। फ्लोरोसिस के कारण इस गांव के लोगों में कमर का असमय टेढ़ा होना, हड्डी कमजोर होना, दांत पीला होना और आंख की रोशनी कम होना आम बात है। जवाहिर उरांव, करीमन, जीतू, लाल बहादुर, पुष्पा धांगर, पूर्व प्रधान संजय, नरेश, बच्चा, रामनाथ, मुनि, पिंटू, दिनेश लाल, बिहारी, अमेरिका, साबिर धांगर आदि का कहना था कि रोहनियादामर बस्ती का हर दूसरा व्यक्ति विकलांगता का शिकार हो रहा है लेकिन जिम्मेदार ध्यान देने का नाम नहीं ले रहे हैं। प्रधान उदय यादव का कहना था कि वह भी अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन यहां के लोगों को पूरी तरह से शुद्ध पेयजल अभी तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। वहीं सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का कहना था कि वह उस गांव में हर माह कैंप लगवाते हैं। इस बीमारी में लक्षण के आधार पर इलाज किया है।
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