फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Worshippers face problems

बड़ी कठिन है होली परिक्रमा की डगर

Sun, 28 Feb 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Sun, 28 Feb 2016 11:45 PM IST
विज्ञापन
Worshippers face problems
कोल्हुआ बरेठी स्थान भी ऐतिहासिक 84 कोसीय होली परिक्रमा का पड़ाव स्थल है। कभी यहां पर भी श्रद्धालु डेरा डलते थे, पूरी रात रामधुन गूंजती थी, लेकिन अब इस पड़ाव स्थल की रातें परिक्रमा के दौरान भी सूनी कटती हैं।
विज्ञापन


अब यहां श्रद्धालु डेरा नहीं डालते हैं। वजह ये है कि अन्य पड़ावों की तरह यह पड़ाव स्थल भी बदहाली, अवैध कब्जों व जिम्मेदारों की उदासीनता की भेंट चढ़ गया है। नौबत यह है कि नैमिषारण्य से कोल्हुआ बरेठी आने वाला परिक्रमा मार्ग गुम हो गया।
विज्ञापन


मार्ग पर झाड़ियां उग आई हैं, जबकि अधिकांश मार्ग खेती में समा गया है। पड़ाव स्थलों पर श्रद्धालुओं के ठहरने भर की भी जगह नहीं है। इससे श्रद्धालुओं ने यहां पर डेरा डालना छोड़ दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोल्हुआ बरेठी गांव अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए है। संतों व महंतों का कहना है कि परिक्रमा के दौरान महर्षि दधीचि के आह्वान पर हिंदू धर्म के सारे तीर्थ व देवी देवता नैमिषारण्य क्षेत्र में आए थे। जिनको अलग-अलग जगहों पर स्थान दिया गया था।

कोल्हुआ बरेठी में केदारनाथ धाम, बदरीनाथ धाम व चित्रकूट को स्थान दिया गया था। ये तीनों धार्मिक स्थल करीब चार किलोमीटर की दूरी में स्थित हैं। इन स्थलों की बदहाली पर नजर डालें तो नैमिषारण्य से आगे बढ़ने वाली परिक्रमा यात्रा केदारनाथ धाम होते हुए, कोल्हुआ बरेठी पहुंचती है।

केदारनाथ धाम का हाल यह है कि यहां तक श्रद्धालुओं को पहुंचाने वाला मार्ग गुम हो गया है। उस मार्ग पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। जबकि अधिकांश मार्ग खेतों में गुम हो गया है। यहां पर केदारनाथ मंदिर का भी बुरा हाल है। इस स्थान पर इतनी जगह नही है कि यहां लोग ठहर सकें।

यहां से आगे बढ़ने पर श्रद्धालुओं की दुश्वारियां कम नहीं होती हैं। केदारनाथ से जैसे ही श्रद्धालु बदरीनाथ के लिए बढ़ेंगे, उन्हें धूल भरे मार्ग पर चलना होगा। धूल भी इतनी मात्रा में कि अगर बरसात हो जाए तो यह मार्ग दलदल का रूप ले लेगा। बद्रीनाथ स्थान का भी बुरा हाल है।

गांव के अंदर बदरीनाथ मंदिर बना हुआ है। गांव के मार्ग कीचड़युक्त व ऊबड़-खाबड़ हैं। यहां पर भी श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था नहीं है। या तो श्रद्धालु केदारनाथ से बदरीनाथ जाने वाले धूल भरे मार्ग में डेरा डालें या फिर आगे बढ़ जाएं। रास्ते में लक्ष्मण टीला पड़ता है।

बताते हैं कि परिक्रमा के दौरान भगवान श्रीराम के साथ चल रहे लक्ष्मण ने यहां विश्राम किया था। जिससे उस स्थान का नाम लक्ष्मण टीला पड़ गया। जिम्मेदारों की लापरवाही का हाल यह है कि अवैध खनन करने वालों ने उस टीले को खोदकर मिट्टी गायब कर दी। बचे हुए टीले पर क्षेत्र के किसान खेती कर रहे हैं।

यहां पर भी श्रद्धालुओं के ठहरने योग्य स्थान नहीं है। यहां से आगे बढ़ने पर चित्रकूट धाम पड़ता है। यहां के ऐतिहासिक तीर्थ ने सूखे तालाब का रूप ले लिया है, इसमें एक भी बूंद पानी नही है। मंदिर स्थल पर सरकार ने कई हैंड पाइप लगवाए और उन्हें भूल गई।

नतीजा हैंड पाइप ही लोगों ने उखाड़ने शुरू कर दिए। मंदिर स्थल तक लोग खेती कर रहे हैं। कुल मिलाकर यहां पर हर तरफ बदहाली ही बदहाली नजर आती है। यहां पर पड़ाव भर का स्थान न मिलने के कारण श्रद्धालुओं ने यहां पर डेरा डालना ही बंद कर दिया है।

श्रद्धालु नैमिषारण्य से निकलने के बाद कोल्हुआ बरेठी पर डेरा डालने के बजाय मिश्रिख पहुंचते हैं। चार किलोमीटर से अधिक दूरी तक ऐतिहासिक मंदिर व धर्मस्थल हैं।  इसके बावजूद श्रद्धालुओं के ठहरने भर की जगह नहीं है।

संजीदा नहीं जिम्मेदार
केदारनाथ आश्रम के पुजारी बाबा बड़कू दास कहते हैं कि परिक्रमा को लेकर कोई भी जिम्मेदार संजीदा नहीं है। यही वजह है कि परिक्रमा मार्ग ही गुम हो गया है। इन मार्गों से बमुश्किल ही श्रद्धालु आगे बढ़ पायेंगे।

जबकि केदारनाथ तीर्थ का महत्व ये है कि उत्तराखंड से केदारनाथ यहां पर आए थे। जिनको इसी परिक्रमा मार्ग पर स्थान दिया गया था। इतना महत्वपूर्र्ण स्थान होने के बावजूद यह उपेक्षित है।

बस वसूली जानता है प्रशासन
बदरीनाथ धाम के पुजारी बाबा अर्जुन दास कहते हैं कि यहां पर प्रशासन बस वसूली करना ही जानता है। मगर सुविधाओं पर कोई ध्यान नही दे रहे हैं। मंदिर परिसर में बामुश्किल 10 आदमी ही आ पाते हैं।

परिक्रमा के दौरान यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जो प्रसाद के साथ चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशासन का एक कर्मचारी यहां पहुंच जाता है और आने वाले चढ़ावे को बटोरकर ले जाता है।

यहां श्रद्धालुओं के ठहरने भर का स्थान नहीं है। इस वजह से श्रद्धालु यहां पर ठहरे बगैर आगे बढ़ जाते हैं। पुजारी का कहना है कि मान्यता है कि परिक्रमा के दौरान हर बार बाबा बद्रीनाथ यहां जरूर आते हैं।

केदारनाथ की महिमा
इसका संक्षेप में इतिहास यह है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनकी प्रार्थना के अनुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया।

यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित हैं। केदारनाथ की बड़ी महिमा है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ ये दो प्रधान तीर्थ हैं। दोनों के दर्शनों का बड़ा ही महात्म्य है।

केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फ ल जाती है और केदारनाथ सहित नर नारायण मूर्ति के दर्शन का फ ल जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया जाता है। ये बड़े सौभाग्य की बात है कि ये तीर्थ यहां पर मौजूद हैं।

बदरीनाथ का महत्व
बदरीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की उपत्यका में अवस्थित हिन्दुओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखंड दीप जलता है। जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है।

यह भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ स्थल है। प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बदरीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य ही करे। यहां पर शीत के कारण अलकनन्दा में स्नान करना अत्यन्त ही कठिन है।

अलकनन्दा के तो दर्शन ही किए जाते हैं। यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं। नैमिष क्षेत्र में ये तीर्थ परिक्रमा मार्ग पर स्थित है।

चित्रकूट का महत्व
चित्रकूट प्राचीनकाल से ही हमारे देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थ रहा है। वनवास काल में राम ने चित्रकूट में साधनाकर शक्ति का संचय किया एवं अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लिया था।


मंदाकिनी के किनारे एक विशाल शिला पर बैठे राम ने जयंत पर बाण चलाया था। यूं तो चित्रकूट बुंदेलखंड में है, लेकिन महर्षि दधीचि की यात्रा के दौरान इस तीर्थ को नैमिष क्षेत्र में आना पड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed