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घाटी के हालात याद कर कांप उठती है रूह
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jul 2016 10:33 PM IST
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अमरनाथ एक्सप्रेस का इंजन
- फोटो : अमर उजाला
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वहां सड़कों पर सन्नाटा हैं। बाजार बंद हैं। अचानक हंगामा होता है और इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठता है। वहां जो पहुंचा समझो फंसकर रह गया। अगर वहां सेना न हो, तो लोगों का जिंदा वापस आना ही मुश्किल है।
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उपद्रवियों से घाटी लहूलुहान हो रही है। लोग सहमे-सहमे हैं। कुछ ऐसी सच्चाई बयां कर रहे हैं घाटी से बचकर वापस पहुंचे लोग। अमरनाथ यात्रा से सकुशल लौटने पर इनके घरवालों ने भी राहत की सांस ली है।
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शहर के मोहल्ला बट्सगंज निवासी मोती लाल वर्मा अपनी पत्नी शिल्पी वर्मा, अपने मित्र मोहल्ला शिवपुरी निवासी धर्मेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र की पत्नी सीमा शर्मा, भार्गव कॉलोनी निवासी राम नरेश पांडेय, राम नरेश पांडेय की पत्नी तोस पांडेय, गुप्ता कालोनी निवासी गिरीशचंद्र शुक्ला, मुंशीगंज निवासी दिलीप सक्सेना, सिविल लाइन निवासी उपकार वर्मा, संदीप वर्मा, महोली के चमखर निवासी मुकेश त्रिवेदी, ऐलिया निवासी विनोद यादव, महोली के मूलचंद वर्मा के साथ 6 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर रवाना हुए थे।
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7 जुलाई को जब वे जम्मू पहुंचे, तो पता चला कि वहां बवाल चल रहा है। सोचा कुछ समय बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा, इस वजह से बाबा बर्फानी के दर्शन की प्रक्रिया पूरी करने लगे। सड़क मार्ग बंद हो गया तो हवाई जहाज से श्रीनगर पहुंचे।
यहां पहुंचने पर आभास हुआ कि जैसे वे किसी बडे़ खतरे में फंस गए हैं। श्रीनगर में कोई भी वाहन यात्रियों को मिल नहीं रहा था। तीन घंटे इंतजार के बाद दो टैक्सी चालक होटलों तक ले जाने को तैयार हुए। रास्ते में बवाल चल रहा था। किसी तरह होटल पहुंचे।
धर्मेंद्र शर्मा कहने लगे कि होटल से कुछ दूरी पर सड़क थी। जहां से अक्सर गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती थी। घर से जो रुपये लेकर गए थे, वह भी खत्म होने लगे। हालात सामान्य होने के बजाय बिगड़ते जा रहे थे। वहां बता दिया गया कि अब बाबा बर्फानी के दर्शन नहीं हो सकते। किसी तरह घाटी से वापस जम्मू पहुंचे। ट्रेन से जब सीतापुर की ओर चले तो सुकून मिला।