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फास्टैग की सुविधा के बाद भी जाम, रेंग रहे वाहन
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सीतापुर। लखनऊ-सीतापुर हाईवे पर खैराबाद टोल प्लाजा पर रविवार को दिन में कई बार लोग जाम से जूझने को मजबूर हुए। फास्टैग सिस्टम लागू होने के बाद भी टोल पर जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल रहा है। फास्टैग सिग्नल कमजोर होने से ट्रैकिंग में हो रही देरी व सहालग के चलते चौपहिया वाहनों का लोड बढ़ने से यह समस्या हुई। कुछ देर में ही लगभग चार सौ मीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग जाती। फिर वाहनों का काफिला रेंगकर आगे बढ़ता। टोल बैरियर से दो सौ मीटर करीब पहुंचने के बाद भी एक वाहन को निकलने में 15 से 20 मिनट लग रहे है।
सहालग को लेकर हाईवे पर आम दिनों की अपेक्षा इस समय ट्रैफिक लोड बढ़ा है। जिससे आए दिन खैराबाद टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति रहती है। रविवार को दिनभर वाहन सवार जाम से जूझते रहे। फास्टैग लाइन पर सिग्नल कमजोर होने से ट्रैकिंग में हो रही देरी के अलावा कर्मचारियों की लापरवाही जाम की वजह बनी। यहां अप-डाउन मिलाकर कुल 12 लेन हैं। फास्टैग के अलावा दो लेन कैश वाली भी संचालित हैं। जाम लगने पर कर्मचारी जल्दी वाहनों को निकालने के लिए बिना फास्ट टैग वाले वाहन फास्टैग वाली लेन में यह कहकर भेज देते हैं कि इस लेन में भी पर्ची कट जाएगी।
जबकि टीसी वहां डबल शुल्क मांगता है, जिससे विवाद खड़ा हो जाता है। नतीजतन, जाम लग जाता है। इसके अलावा वाहनों की लंबी लाइन देख जल्दी निकलने की होड़ में चालकों के आड़े-तिरछे वाहन लगा देना भी जाम की वजह बन जाता है। टोल प्रबंधन के पास इन सभी समस्याओं के निदान का कोई विकल्प नजर नहीं आया। प्रत्येक लेन में वाहन सीधी लाइन बनाकर चलें इसके लिए भी कर्मचारी कोई कवायद करते दिखाई नहीं दिए। लिहाजा, दिन में कई बार जाम लगा। शाम को जाम की समस्या और विकराल हो जाती है।
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टोल प्लाजा मैनेजर अंकेश श्रीवास्तव ने बताया कि वाहन चालकों की मनमानी से जाम लगता है। बिना फास्टैग वाले वाहन फास्टैग वाली लेन में ले जाकर फिर नियमानुसार दोगुना शुल्क देने से लोग मना करते हैं। इसी बहस के दौरान जाम लग जाता है।
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सहालग को लेकर हाईवे पर आम दिनों की अपेक्षा इस समय ट्रैफिक लोड बढ़ा है। जिससे आए दिन खैराबाद टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति रहती है। रविवार को दिनभर वाहन सवार जाम से जूझते रहे। फास्टैग लाइन पर सिग्नल कमजोर होने से ट्रैकिंग में हो रही देरी के अलावा कर्मचारियों की लापरवाही जाम की वजह बनी। यहां अप-डाउन मिलाकर कुल 12 लेन हैं। फास्टैग के अलावा दो लेन कैश वाली भी संचालित हैं। जाम लगने पर कर्मचारी जल्दी वाहनों को निकालने के लिए बिना फास्ट टैग वाले वाहन फास्टैग वाली लेन में यह कहकर भेज देते हैं कि इस लेन में भी पर्ची कट जाएगी।
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जबकि टीसी वहां डबल शुल्क मांगता है, जिससे विवाद खड़ा हो जाता है। नतीजतन, जाम लग जाता है। इसके अलावा वाहनों की लंबी लाइन देख जल्दी निकलने की होड़ में चालकों के आड़े-तिरछे वाहन लगा देना भी जाम की वजह बन जाता है। टोल प्रबंधन के पास इन सभी समस्याओं के निदान का कोई विकल्प नजर नहीं आया। प्रत्येक लेन में वाहन सीधी लाइन बनाकर चलें इसके लिए भी कर्मचारी कोई कवायद करते दिखाई नहीं दिए। लिहाजा, दिन में कई बार जाम लगा। शाम को जाम की समस्या और विकराल हो जाती है।
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टोल प्लाजा मैनेजर अंकेश श्रीवास्तव ने बताया कि वाहन चालकों की मनमानी से जाम लगता है। बिना फास्टैग वाले वाहन फास्टैग वाली लेन में ले जाकर फिर नियमानुसार दोगुना शुल्क देने से लोग मना करते हैं। इसी बहस के दौरान जाम लग जाता है।