फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Understand the condition in which God keeps you compassionate: Morari Bapu

परमात्मा जिस हाल में रखे, उसे समझें अनुकंपा : मोरारी बापू

Mon, 30 Aug 2021 12:11 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 12:11 AM IST
विज्ञापन
Understand the condition in which God keeps you compassionate: Morari Bapu
नैमिषारण्य में श्रीराम कथा का रस पान कराते मोरारी बापू। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। मेघनाथ की ललकार से गुस्साए लक्ष्मण युद्ध के लिए के लिए जाते हैं, लेकिन मेघनाथ अपनी मायावी शक्तियों से लक्ष्मण पर शक्तिबाण से प्रहार करता है। इससे लक्ष्मण घायल होकर धरा पर गिर जाते हैं। नैमिषारण्य में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन रविवार को मरोरी बापू ने संजीवनी बूटी का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा जिस हाल में रखे, उसे अनुकंपा माननी चाहिए।
विज्ञापन

मारोरी बापू ने कहा कि जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब हनुमान लक्ष्मण को राम के पास लेकर जाते हैं। राम उन्हें देखकर शोक में डूब जाते हैं। इसके बाद सभी लक्ष्मण के इलाज का उपाय ढूंढने लगते हैं। तब विभीषण कहते हैं कि हनुमान सुषैण वैद्य को ले आएं तो वह लक्ष्मण का इलाज कर सकते हैं। सुषैण वैद्य पहले लक्ष्मण का इलाज करने के से मना कर देते हैं, लेकिन राम और विभीषण के आग्रह करने पर वे इलाज को तैयार हो जाते हैं। सुषैण वैद्य श्रीराम से कहते हैं कि यदि वह अपने भाई को जीवित देखना चाहते हैं तो हिमालय पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आएं।
विज्ञापन

वैद्य के कहने पर हनुमान श्रीराम की आज्ञा लेकर संजीवनी बूटी लेने के लिए निकल पड़ते हैं। संजीवनी बूटी को ढूंढ लेने के बाद हनुमान पूरा पहाड़ उठाकर रणभूमि में पहुंच जाते हैं। हनुमान को देखकर श्रीराम के साथ विभीषण, जामवंत, सुग्रीव सहित अन्य सभी प्रसन्न हो जाते हैं। मोरारी बापू ने श्रद्धालुओें को समझाया कि परमात्मा जिस हाल में रखे, उसे अनुकंपा माननी चाहिए। मेरे परमात्मा ने जो मुझे दिया वो विशाल वियोग भी मेरे लिए प्रसाद है। पीड़ा मिलने पर संशय न करो। संशय आदमी को कमजोर करता है और विश्वास आदमी को दृढ़ करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रामचरित मानस को खूब पियो और जियो। कभी संशय नहीं रहेगा। लंका और रावण का उद्धार करने के बाद भगवान राम और जानकी का मिलन होता है। 14 वर्ष के बाद भगवान राम अयोध्या पहुंचते हैं तो सबसे पहले जन्मभूमि की पूजा करते हैं। भरत और भगवान राम एक-दूसरे के गले मिलते हैं। भगवान राम ने राजगद्दी संभाली। इसका उत्सव लंबे समय तक मनाया गया। लवकुश के जन्म का वर्णन करने के साथ ही श्रीराम कथा का समापन हुआ। संत मोरारी बापू ने कहा कि बहुत जल्द ही दोबारा इस भूमि पर रामकथा का भव्य आयोजन किया जाएगा।

बच्चे को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
नैमिष में श्रीराम कथा के दौरान मोरारी बापू कालीपीठ पहुंचे, जहां पर कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री के पौत्र के अन्नप्राशन में शामिल होकर मोरारी बापू ने अपने हाथों से बच्चे को खीर खिलाई। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अन्नप्राशन का कार्यक्रम संपन्न कराया। इस मौके पर कालीपीठ के संस्थापक प्रधान पुजारी जगदंबा प्रसाद, कालीपीठाधीश गोपाल शास्त्री, भास्कर पुजारी, सत्यम पुजारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed