{"_id":"58c82e034f1c1b6a2d32a3e0","slug":"two-mla-became-in-pokhara","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोखरा जश्न में डूबा, गांव के दो लोग बने विधायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोखरा जश्न में डूबा, गांव के दो लोग बने विधायक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Mar 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
up election 2017
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पोखरा कलां गांव इन दिनों चर्चा में है। यहां चुनाव परिणामों के साथ होली की खुशियां दोगुनी हो गईं हैं। जानकारों की मानें तो पोखरा प्रदेश का इकलौता ऐसा गांव है जहां से इस बार दो-दो विधायक मिले हैं। यह अनोखा और यादगार मौका महमूदाबाद तहसील के लोगों को मिला है।
विज्ञापन
भले ही यह परिवार अलग-अलग राजनीतिक दलों का झंडा बुलंद किए है लेकिन एक परिवार के दो लोगों के विधायक बनने से क्षेत्र की जनता के हाथ मानों जैसे विकास की कुंजी लग गई हो।
विज्ञापन
महमूदाबाद के पोखरा के रहने वाले नरेंद्र सिंह के पिता इकबाल सिंह वर्मा व साकेंद्र के पिता रामकुमार वर्मा सगे भाई हैं। कभी आरएसएस के सदस्य रहे नरेंद्र सिंह वर्मा ने महमूदाबाद विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सिंबल पर छठी बार जीत हासिल की और मोदी लहर में भी अपने दुर्ग को बचाने में कामयाब रहे।
विज्ञापन
हालांकि इस बार वह काफी मुश्किल से चुनाव जीत सके। वहीं पोखरा कलां के रहने वाले साकेंद्र प्रताप वर्मा बाराबंकी जिले की कुर्सी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं। साकेंद्र के पिता रामकुमार वर्मा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रमुख भी हैं।
साकेंद्र पैंतेपुर के इंटर कॉलेज में अध्यापक होने के साथ ही एक कुशल वक्ता और साहित्यकार भी हैं। कई बार बिसवां सीट से उनका नाम चर्चा में रहा, लेकिन इस बार पहली बार पार्टी ने उन्हें बाराबंकी के कुर्सी विधानसभा सीट से टिकट दिया और वह यह सीट पार्टी की झोली में डालने में कामयाब भी हो गए।
साकेंद्र इससे पहले सीतापुर में बीजेपी के जिलाध्यक्ष भी रह चुके है। खास बात तो यह है कि नरेंद्र वर्मा ने भी अपना पहला चुनाव बीजेपी टिकट पर ही जीता था। बहरहाल इस वक्त पोखरा गांव जश्न में डूबा है, क्योंकि उनके गांव के लिए यह बेहद सुनहरा मौका है। ग्रामीणों की मानें तो पूरे प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा गांव होगा, जहां के दो लोग विधायक बने हो।