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Sitapur News: बायोमीट्रिक का दुरुपयोग कर खोलते थे खाते, दो गिरफ्तार

Fri, 18 Sep 2026 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 18 Sep 2026 11:38 PM IST
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Two arrested for opening accounts by misusing biometrics.
गिरफ्तार आरोपी
सीतापुर। सरकारी योजना का लाभ दिलाने और पैन कार्ड बनवाने का झांसा देकर ग्रामीणों से बायोमीट्रिक लेने और उसका दुरुपयोग कर बैंक खाते खुलवाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों हरदोई जिले के रहने वाले हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी सिम कार्ड निकलवाकर उनके जरिये खाते खुलवाते थे। इन खातों में गेमिंग एप के रुपये मंगवाए जाते थे। आरोपियों के पास से मोबाइल बरामद हुआ है, जिसमें गेमिंग ऐप से जुड़े विवरण मिले हैं।
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सीओ मिश्रिख विशाल गुप्ता ने बताया कि 26 अगस्त को खुर्शीदाबाद निवासी एक ग्रामीण ने मिश्रिख कोतवाली और साइबर पुलिस को धोखाधड़ी की जानकारी दी थी। ग्रामीण ने बताया था कि उसका न तो किसी बैंक में खाता है और न ही उसके नाम कोई मोबाइल नंबर है। इसके बावजूद उसे बैंक में खाता खुला होने की जानकारी मिली। जांच में हरदोई के माधोगंज निवासी विकास कुमार और थाना भगौली के सैदापुर कला निवासी मंजेश के नाम सामने आए।
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पुलिस ने शुक्रवार को दोनों को अहरोली संपर्क मार्ग से ग्रामीणों की मदद से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने की बात कहते थे। इसके लिए पैन कार्ड जरूरी बताते थे। आरोपियों का कहना था कि तहसील या जिला मुख्यालय पर पैन कार्ड बनवाने में अधिक रुपये लगेंगे, जबकि उनकी टीम 50 रुपये में कार्ड बनवा देगी। इसी झांसे में ग्रामीण बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर आधार संबंधी जानकारी दे देते थे।
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पुलिस के अनुसार आरोपी बायोमीट्रिक के जरिये सिम कार्ड निकलवाते थे। इसके बाद उसी नंबर से बैंक खाता खुलवाकर उसमें गेमिंग एप से रुपये मंगवाए जाते थे। इस काम के बदले आरोपियों को दो से तीन प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया।
जनसुविधा केंद्र संचालक है गिरोह का सरगना
इंस्पेक्टर मिश्रिख प्रदीप सिंह ने बताया कि मामले में एक माह पहले तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। गिरोह का सरगना विकास कुमार माधोगंज में जनसुविधा केंद्र चलाता है। उसे सिम कार्ड और पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया की जानकारी थी। वह साथियों को गांव-गांव भेजकर ग्रामीणों की बायोमीट्रिक करवाता था और इसके बदले उन्हें रुपये देता था।

दस्तावेज बनवाते समय रहें सतर्क
साइबर विशेषज्ञ संजय पांडेय ने बताया कि गेमिंग एप से रुपये आने पर आरोपियों को कमीशन मिलता था। उन्होंने लोगों से अपील की कि पैन कार्ड और आधार संबंधी काम केवल अधिकृत केंद्रों से ही कराएं। किसी अनजान व्यक्ति को बायोमीट्रिक न दें। ठगी की जानकारी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
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